बालोद

कृषि उपकरणों के साथ गोवंश की पूजा कर किसानों ने अच्छे फसल की कामना की

अंचल में शनिवार को प्रदेश का पहले पर्व हरेली को धूमधाम से मनाया गया। किसानों ने अपने कृषि औजारों के साथ बैल व मवेशियों की नहलाकर विशेष पूजा की।
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Updated: 12 Aug 2018, 8:10 AM IST
balod patrika
कृषि उपकरणों के साथ गोवंश की पूजा कर किसानों ने अच्छे फसल की कामना की

बालोद. अंचल में शनिवार को प्रदेश का पहले पर्व हरेली को धूमधाम से मनाया गया। किसानों ने अपने कृषि औजारों के साथ बैल व मवेशियों की नहलाकर विशेष पूजा की। जिले के ग्रामीण अंचल में हरेली का उत्साह सुबह से ही नजर आ रहा था। किसानों ने कृषि औजारों को धोने के बाद चावल के आटे से बनी चीला रोटी की भोग लगाकर विशेष पूजा की, साथ ही भगवान से अच्छे फसल उत्पादन के लिए प्रार्थना किए।

मवेशियों को खिलाई गई गेहूं आटे की लोंदी और जड़ी-बूटियों की दवाई
वहीं इस अवसर पर किसानों ने आधी रात को चरवाहों (राउत) द्वारा जड़ी-बूटियों से बनाई गई दवाई को अपने-अपने मवेशियों को खिलाने के साथ गेहूं के आटे से बने लोंदी में नकम मिलाकर खिलाया। मान्यता है कि इसके सेवन से मवेशी बीमार नहीं पड़ते हैं।

घर के मुख्य द्वार व कृषि औजारों पर लगाया नीम की टहनी
इसके अलावा चरवाहा (राउत) ने हरेली पर सुबह-सुबह लोगों के घर जाकर नीम की टहनी को मुख्य द्वार व कृषि औजारों पर लगाया। जानकारों के मुताबिक, घरो के आगे नीम की टहनी लगाने से घर का वातावरण स्वच्छ रहता है, जिससे घर के सदस्य बीमार नहीं पड़ते हैं।

घर-घर बनाए गए पकवान
हरेली पर घर-घर पकवान बनाया जाता है। घरों में पारंपरिक पूड़ी, गुलाब जामुन, पकौड़े, बड़ा आदि बनाए गए। कृषि औजारों की पूजा करने के बाद ही लोग इन व्यंजनों का सेवन किया, साथ ही एक-दूसरे के घर जाकर हरेली की बधाई देने के साथ घर में बने पकवानों का स्वाद लिया।

बच्चों ने लिया गेड़ी चलाने का आनंद
हरेली पर कई गांवों में खेल का भी आयोजन किया गया, जिसमें महिलाओं ने भी बढ़-चढ़ हिस्सा लिया। हरेली पर गेड़ी चलाने की परंपरा है, जिसका पालन करते हुए गांवों में बच्चे गेड़ी पर चढ़कर गांव की कीचड़ से भरी गलियों में दौड़ते नजर आए।

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