बालोद

छत्तीसगढ़ के चार चमत्कारी गणेश मंदिर, संतान प्राप्ति के लिए आते हैं भक्त, भुईंफोड़ बप्पा बरसाते हैं कृपा

Chhattisgarh Ganesh Temple: इस गणेश चतुर्थी पर बालोद के उन 4 चमत्कारी धामों के दर्शन करा रहा है, जहां आस्था और इतिहास एक साथ मिलते हैं। आइए जानते हैं बप्पा के चमत्कारी धामों की कहानी..
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Sep 14, 2026
chhattisgarh ganesh temple
छत्तीसगढ़ के चार चमत्कारी गणेश मंदिर ( Photo - Patrika )

Balod Ganesh Temple: गणेश चतुर्थी पर पंडालों में बप्पा की धूम है, वहीं बालोद शहर अपने गर्भ में सदियों पुराने गजानन का इतिहास समेटे हुए है। जिला मुख्यालय के 4 ऐसे गणेश मंदिर, जिनके बिना गणेश भक्ति अधूरी है। किसी मंदिर में 13वीं शताब्दी की 6 फीट ऊंची विशाल प्रतिमा है, तो कहीं बप्पा स्वयं धरती का सीना चीरकर प्रकट हुए हैं। ( Chhattisgarh News ) पत्रिका इस गणेश चतुर्थी पर बालोद के उन 4 चमत्कारी धामों के दर्शन करा रहा है, जहां आस्था और इतिहास एक साथ मिलते हैं।

Chhattisgarh Ganesh Temple: कपिलेश्वरधाम में भक्तों पर बप्पा की कृपा

कपिलेश्वरधाम में भक्तों पर बप्पा की कृपा ( Photo - patrika)

नयापारा वार्ड स्थित कपिलेश्वर मंदिर समूह बालोद की सबसे प्राचीन धरोहर है। 13वीं-14वीं शताब्दी में कलचुरी और नागवंशी शासकों की ओर से निर्मित यह परिसर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण से संरक्षित है। यहां मुख्य शिव मंदिर के ठीक सामने पीढ़ा देवल शैली में गणेशजी का स्वतंत्र मंदिर बना है। गर्भगृह में 6 फीट ऊंची विशाल, भव्य काले पाषाण की प्रतिमा विराजमान है, जो अपने आप में शिल्प कला का अद्भुत नमूना है। मुख्य मंदिर के द्वार पर लगी दो अन्य प्राचीन मूर्तियां भी कलचुरी काल की हैं।

मरारपारा में मानव निर्मित नहीं, भुईंफोड़ गणेश

भुईंफोड़ गणेश ( Photo - Patrika )

शहर के बीच मरारपारा में स्थित यह मंदिर आस्था का सबसे बड़ा केंद्र है। करीब 100 साल से भी ज्यादा पुराने इस मंदिर की प्रतिमा किसी मूर्तिकार ने नहीं गढ़ी। इसे भूमिफोड़ स्वयंभू कहा जाता है। मान्यता है कि खुदाई के दौरान यह प्रतिमा प्रकट हुई थी। आज भी बप्पा का आधा शरीर जमीन में धंसा हुआ है और बुजुर्ग बताते हैं कि प्रतिमा का आकार धीरे-धीरे बढ़ रहा है। संतान प्राप्ति के लिए यहां लगने वाली भीड़ इसका चमत्कार बताती है।

ठाड़ महामायाधाम में रक्षा करते हैं विघ्नहर्ता

ठाड़ महामायाधाम ( Photo - patrika )

बालोद के ऐतिहासिक किले परिसर में मां ठाड़ महामाया का प्रसिद्ध शक्तिपीठ है। इस मंदिर का इतिहास गोंडवाना राजवंश से जुड़ा है। सनातन मान्यता है कि देवी के दरबार में सबसे पहले गणेशजी की पूजा होती है। यहां गर्भगृह से पहले रक्षक के रूप में विराजे गणेशजी सदियों से इस शक्तिपीठ की विघ्नों से रक्षा कर रहे हैं। मां के दर्शन से पहले बप्पा के दर्शन करना अनिवार्य माना जाता है।

पाररास मेें नए युग की नई आस्था

सिद्धि विनायक मंदिर ( Photo - patrika )

जिला मुख्यालय से सटे पाररास में बना सिद्धि विनायक मंदिर आधुनिक बालोद की आस्था का प्रतीक है। निर्माण नया है, लेकिन मान्यता बहुत बड़ी है। सिद्धि विनायक स्वरूप में बप्पा विराजे हैं। गणेश चतुर्थी पर यहां का दृश्य देखते ही बनता है। स्थानीय लोगों का विश्वास है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई हर मन्नत बप्पा जरूर पूरी करते हैं। वही बुढ़ापारा में बनाए गए खुला संग्राहालय में भी बारसुर पत्थर से बनी प्राचीन गणेश की प्रतिमा है।

Updated on:
14 Sept 2026 12:25 pm
Published on:
14 Sept 2026 12:25 pm