
सतीश रजक/बालोद. माओवादी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए पुलिस विभाग हाईटेक तैयारी कर रहा है। इसके लिए ड्रोन कैमरे का सहारा लेगी। हाईटेक कैमरे माओवादी गतिविधियों की जानकारी उपलब्ध कराएगी। बता दें कि बालोद जिला भी नक्सली गतिविधियों के लिए जाना जाता है। इसका प्रमाण जिले में समय-समय पर इनकी गतिविधि देखी गई है, तो वहीं इस जिले के कुछ ब्लॉकों के गांवों में कुछ नक्सली भी हथियार के साथ पकड़े भी गए हैं।
नक्सल मुक्त जिला बनाने कर रहे हैं सर्चिंग
ऐसे में माओवादी गतिविधियों को नियंत्रित करने, किसी बड़ी घटना को अंजाम न दे पाए इसलिए जिला पुलिस लगातार योजनाओं पर काम कर रही है। नक्सल मुक्त जिला बनाने के लिए बालोद पुलिस सीमा क्षेत्र से लगे हुए जंगलों में पुलिस के साथ अन्य बटालियनों के सहयोग से लगातार सर्चिंग कर रहे हैं। दूसरी ओर पुलिस माओवादी प्रभावित क्षेत्रों के गांवों तक पहुंचकर लोगों के दुख-दर्द व समस्याओं का निराकरण कर उनके बीच नई पैठ बनाने में सफल हो रहे हैं। जवान लोगों को बता रहे हैं कि नक्सलियों से किस तरह समाज, देश को नुकसान हो रहा है। साथ ही ग्रामीणों से पुलिस से डर भगाया जा रहा है। वहीं पुलिस की ऐसी गतिविधि व जिले के जंगलों में लगातार सर्चिंग के कारण माओवादी गतिविधियों में भी कमी आई है, पर अब ड्रोन कैमरे से नक्सली गतिविधियों पर निगरानी से पुलिस को और सहायता मिलने वाली है।
बालोद क्षेत्र में पहली बार 2008 में हुई थी पहली नक्सली घटना
पुलिस विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक अविभाजित दुर्ग जिले के समय 2 मार्च 2008 को वर्तमान बालोद जिले के महामाया थाना क्षेत्र के बीएसपी माइंस दल्ली में घुस कर माइंस के 1750 किलोग्राम बारूद लूट लिए थे। क्षेत्र में यही पहली नक्सली घटना थी। उसके बाद पहली बार इस क्षेत्र के लोग नक्सलियों की दहशत से डरे थे। इसी समय से जिले में इनकी गतिधियां तेज हुई थी।
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