
Chhattisgarh Bus Fare Hike: छत्तीसगढ़ में बस से सफर करने वाले यात्रियों की परेशानी बढ़ गई है। परिवहन विभाग के निर्देश के बाद यात्री बसों का किराया बढ़ाकर 1.75 रुपये प्रति किलोमीटर की दर से लागू कर दिया गया है, लेकिन कई बसों में अब तक नई किराया सूची नहीं लगाई गई है। इससे यात्रियों को यह पता लगाने में परेशानी हो रही है कि उन्हें अपनी यात्रा के लिए कितना किराया देना है। बलौदाबाजार, पाण्डुका और आसपास के ग्रामीण व अंतर-जिला मार्गों पर रोजाना सफर करने वाले यात्रियों का कहना है कि रेट लिस्ट नहीं होने से किराए को लेकर असमंजस बना हुआ है। वहीं, कुछ यात्रियों ने कंडक्टरों पर मनमाना किराया वसूलने के आरोप भी लगाए हैं।
बस किराए में बढ़ोतरी लागू होने के बाद यात्रियों को उम्मीद थी कि सभी बसों में नई किराया सूची लगा दी जाएगी, ताकि सफर के दौरान उन्हें किराए की सही जानकारी मिल सके। हालांकि, यात्रियों के मुताबिक कई बसों में अब तक नई रेट लिस्ट चस्पा नहीं की गई है। ऐसे में यात्रियों के लिए यह तय करना मुश्किल हो रहा है कि किसी निश्चित दूरी के लिए निर्धारित किराया कितना है। इसका असर खासतौर पर उन लोगों पर पड़ रहा है, जिन्हें रोजाना काम, पढ़ाई या दूसरे जरूरी कामों के लिए बस से यात्रा करनी पड़ती है। ग्रामीण क्षेत्रों से जिला मुख्यालय और दूसरे शहरों तक आने-जाने वाले यात्रियों को किराए की जानकारी के लिए बस स्टाफ पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
आधिकारिक किराया सूची उपलब्ध नहीं होने से बसों में यात्रियों और कंडक्टरों के बीच बहस की स्थिति बन रही है। यात्रियों का कहना है कि जब बस में किराए का स्पष्ट चार्ट नहीं लगा है, तो वे यह कैसे तय करें कि उनसे लिया जा रहा पैसा सही है या नहीं। दूरी के हिसाब से किराए की जानकारी नहीं मिलने के कारण यात्रियों को हर बार कंडक्टर से पूछना पड़ता है। कुछ यात्रियों ने आरोप लगाया है कि इसी स्थिति का फायदा उठाकर उनसे मनमाना किराया वसूला जा रहा है। इससे सफर के दौरान अनावश्यक विवाद हो रहे हैं और यात्रियों को आर्थिक परेशानी भी उठानी पड़ रही है।
यात्रियों ने बसों में लगाई गई कुछ किराया सूचियों की प्रमाणिकता पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जिन गिनी-चुनी बसों में नई रेट लिस्ट दिखाई दे रही है, उनमें से कुछ पर किराए की जानकारी सादे कागज पर प्रिंट की गई है। यात्रियों के आरोप के मुताबिक, इन सूचियों पर क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) के अधिकारियों के हस्ताक्षर या आधिकारिक मुहर नहीं है। ऐसे में यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है कि सूची में दर्ज किराया अधिकृत है या बस संचालकों ने अपने स्तर पर इसे तैयार किया है। यात्रियों का कहना है कि किराया सूची स्पष्ट और प्रमाणित होने से उन्हें सफर के दौरान सही रकम का पता रहेगा। इससे किराए को लेकर होने वाली बहस और भ्रम की स्थिति को भी कम किया जा सकता है।
बसों में नियमित सफर करने वाले दैनिक यात्रियों के लिए किराए में बढ़ोतरी के साथ ही नई सूची का नहीं लगना दोहरी परेशानी बन गया है। विद्यार्थियों को स्कूल-कॉलेज आने-जाने के लिए बसों पर निर्भर रहना पड़ता है, जबकि नौकरीपेशा लोग रोजाना तय समय पर अपने कार्यस्थल पहुंचने के लिए सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करते हैं। ग्रामीण इलाकों में बसें कई लोगों के लिए आवागमन का प्रमुख साधन हैं। ऐसे में किराए की सही जानकारी नहीं मिलने से उन्हें अतिरिक्त खर्च की चिंता बनी रहती है। यात्रियों का कहना है कि बस किराया बढ़ने के बाद सभी बसों में संशोधित किराया सूची लगाई जानी चाहिए, ताकि कोई भी यात्री जानकारी के अभाव में परेशान न हो।
दैनिक यात्रियों ने परिवहन विभाग और जिला प्रशासन से मांग की है कि सभी यात्री बसों में संशोधित किराया सूची स्पष्ट रूप से चस्पा कराना सुनिश्चित किया जाए। उनका कहना है कि सूची ऐसी जगह लगाई जानी चाहिए, जहां यात्री आसानी से उसे देख सकें और अपनी यात्रा का किराया जांच सकें। यात्रियों ने यह भी मांग की है कि किराया सूची की प्रमाणिकता सुनिश्चित करने के लिए संबंधित अधिकारियों की मुहर या हस्ताक्षर वाली अधिकृत सूची उपलब्ध कराई जाए।
इसके साथ ही परिवहन विभाग की टीमों को बसों का औचक निरीक्षण करना चाहिए। यदि जांच में निर्धारित दर से अधिक किराया वसूलने की पुष्टि होती है, तो संबंधित बस संचालकों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। अब देखना होगा कि परिवहन विभाग और जिला प्रशासन इस समस्या पर कब तक ध्यान देते हैं। फिलहाल, नई किराया सूची नहीं होने से यात्रियों के सामने सही किराया जानने और अतिरिक्त वसूली की शिकायत करने की चुनौती बनी हुई है।