
गेंदा फूल की खेती (Photo Patrika)
Flower Farming: छत्तीसगढ़ में किसान अब पारंपरिक खेती के साथ आय बढ़ाने के नए विकल्प भी अपना रहे हैं। बलौदाबाजार जिले के सिमगा विकासखंड में गेंदा फूलों की खेती किसानों के लिए कमाई का नया जरिया बनकर उभर रही है। यहां किसान करीब 30 एकड़ में गेंदा फूलों की खेती कर रहे हैं। किसानों द्वारा उत्पादित फूल रायपुर, भिलाई और आसपास के बाजारों में 120 रुपए प्रति किलोग्राम की दर से बेचे जा रहे हैं। खेती से किसानों को प्रति एकड़ 1 लाख से 1.5 लाख रुपए तक का शुद्ध लाभ मिलने की जानकारी सामने आई है। धार्मिक आयोजनों, पूजा-पाठ, त्योहारों, विवाह समारोहों और सजावट में गेंदा फूलों की लगातार मांग के कारण किसानों को बिक्री के अवसर मिल रहे हैं।
सिमगा क्षेत्र के किसान धान जैसी पारंपरिक फसलों के साथ उद्यानिकी फसलों को भी अपना रहे हैं। एक्सटेंशन रिफॉर्म्स यानी आत्मा योजना के अंतर्गत किसान राधेश्याम सोनकर और अन्य कृषकों द्वारा 10 एकड़ में गेंदा फूलों की खेती की जा रही है। वहीं, कुछ अन्य किसान अपने प्रयासों से 20 एकड़ क्षेत्र में गेंदा की फसल ले रहे हैं। इस तरह क्षेत्र में कुल 30 एकड़ में गेंदा फूलों की खेती की जा रही है। किसानों के लिए फूलों की खेती आय के नए अवसर खोल रही है। स्थानीय स्तर पर उत्पादन होने से बाजारों तक फूल पहुंचाना संभव हो रहा है। किसान अपनी उपज रायपुर, भिलाई और आसपास के क्षेत्रों में बेच रहे हैं। इससे पारंपरिक खेती के अलावा अतिरिक्त कमाई का विकल्प विकसित हो रहा है।
गेंदा फूलों की बिक्री करीब 120 रुपए प्रति किलोग्राम की दर से की जा रही है। किसानों को इससे प्रति एकड़ 1 लाख से 1.5 लाख रुपए तक शुद्ध लाभ मिलने की जानकारी दी गई है। हालांकि, वास्तविक मुनाफा उत्पादन, खेती की लागत, फूलों की गुणवत्ता, मौसम और बाजार भाव पर निर्भर करता है। गेंदा फूलों की मांग धार्मिक और सामाजिक आयोजनों में बनी रहती है। मंदिरों में पूजा-पाठ, नवरात्र, दशहरा, दीपावली, विवाह समारोहों और विभिन्न कार्यक्रमों में सजावट के लिए इन फूलों का उपयोग किया जाता है। इसी वजह से फूल उत्पादकों को स्थानीय बाजारों के साथ रायपुर और भिलाई जैसे बड़े शहरों में भी बिक्री के अवसर मिल रहे हैं। किसानों के लिए बाजार की उपलब्धता महत्वपूर्ण है, क्योंकि फूल जल्दी खराब होने वाली उपज है। ऐसे में समय पर तुड़ाई और बाजार तक पहुंचाने की व्यवस्था उनकी कमाई में अहम भूमिका निभाती है।
गेंदा फूलों की खेती को बढ़ावा देने के लिए कृषि विभाग की ओर से भी प्रयास किए जा रहे हैं। कलेक्टर के निर्देशानुसार आत्मा योजना के तहत फसल का लगातार प्रक्षेत्र निरीक्षण किया जा रहा है। इसका उद्देश्य खेती की स्थिति का आकलन करने के साथ अधिक से अधिक किसानों को फूलों की खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है। इसी क्रम में उप संचालक कृषि दीपक कुमार नायक ने हाल ही में गेंदा की खेती का निरीक्षण किया। उन्होंने खेतों में पौधों की बढ़वार, उत्पादन और किसानों की आय बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा की। विभागीय स्तर पर खेती की तकनीक और प्रबंधन से जुड़ी जानकारी के जरिए किसानों को बेहतर उत्पादन के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार, गेंदा फूलों की खेती में उन्नत किस्मों का चयन, समय पर रोपाई, संतुलित पोषण प्रबंधन और कीट-रोगों का उचित नियंत्रण महत्वपूर्ण है। इन तरीकों को अपनाकर किसान फूलों की गुणवत्ता और उत्पादन बेहतर कर सकते हैं।धान और अन्य पारंपरिक फसलों के साथ उद्यानिकी फसलों को अपनाने से किसानों को आय के अलग-अलग स्रोत मिल सकते हैं। सिमगा में 30 एकड़ क्षेत्र में गेंदा की खेती इसी बदलाव का उदाहरण है।
Updated on:
15 Oct 2026 02:03 pm
Published on:
15 Oct 2026 02:02 pm
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