Chhattisgarh Wildlife Update: बलौदा बाजार जिले के बारनवापारा अभयारण्य में तीस साल बाद फिर सुनाई दी टाइगर की दहाड़। ढाई साल का हेल्दी नर बाघ नजर आया।
Chhattisgarh Wildlife Update: बलौदा बाजार जिले के बारनवापारा अभयारण्य में फिर से एक बार जंगल के राजा टाइगर यानि बाघ की दस्तक से हलचल मची हुई है। बीते वर्ष मार्च 2024 में लगभग तीस सालों के बाद टाइगर की दहाड़ सुनाई दी थी जिसके बाद लगभग पौने दो वर्ष बाद फिर से एक बार टाईगर की दस्तक हुई है।
जानकारी के अनुसार वन विकास निगम ने हाल ही में बाघ की पुष्टि तब की है जब निगम क्षेत्र के फील्ड टीम ने जंगल के भीतर गश्त की। गश्त के दौरान उन्हे कुछ जानवरों के ताजे पंजे के निशान नजर आए। शुरू में तो इसे सामान्य जानवर के निशान समझा गया, परंतु जब पंजों के निशान की गहराई, आकार आदि की पड़ताल की गई तो यह परिपक्व बाघ का निशान मिला। बाद में कुछ ग्रामीणों, गाईड द्वारा भी टाइगर को देखे जाने की पुष्टि हुई है।
जानकारी के अनुसार शनिवार से सोमवार के बीच नजर आया टाइगर लगभग ढाई (2.5) वर्ष का नर बाघ है, जो संभवतया पड़ोसी राज्य के जंगल से यहां तक पहुंचा है। टाइगर को देखे जाने की पुष्टि होने के बाद वन विभाग अलर्ट मोड में आ गया है और अधिकारियों द्वारा आगे की प्लानिंग बनाई जा रही है।
महासमुंद और बलौदा बाजार जिले में टाइगर के नजर आने के बाद से वन विभाग के साथ ही साथ पर्यावरणप्रेमियों में हर्ष व्याप्त है। अब तक टाइगर महासमुंद और बलौदा बाजार-भाटापारा जिले के सीमावर्ती इलाकों में ही नजर आया है, परंतु रविवार और सोमवार को टाइगर को बलौदा बाजार वनमण्डल अन्तर्गत लवन रेंज में देखा गया है। रविवार सोमवार को ग्रामीणों तथा वन विभाग के मैदानी अमले ने टाइगर को लवन रेंज के बरबसपुर आदि ग्रामों के आसपास देखा है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार टाइगर की उम्र ढाई वर्ष का होना बताया जा रहा है, जो पूरी तरह स्वस्थ और हेल्दी शरीर का नर बाघ है।
Chhattisgarh Wildlife Update: महासमुंद जिले से टाइगर के लवन रेंज में आने का सीधा अर्थ लगाया जा रहा है कि टाइगर लगातार मूवमेंट कर रहा है। जानकारों के अनुसार एक दिन में टाइगर 35 से 40 किमी का मूवमेंट कर लेता है। लिहाजा टाइगर के लवन रेंज में नजर आने से एक ओर जहां टाइगर के जिले में लौटने की खबर से लोग रोमांचित हैं।
बीते कुछ माह से वनमण्डल में शिकारियों ने हिरण, जंगली सुअर, हाथी के साथ ही साथ बीते दिनों बायसन (गौर) का भी शिकार किया है। जिसके चलते वन मण्डल के जानवरों की सुरक्षा विभाग के लिए बड़ी चुनौती है। वन विभाग द्वारा शिकारियों के खिलाफ कार्रवाई किए जाने के दावे तो जरूर किए जाते हैं परंतु हकीकत है कि इन कार्रवाइयों के बावजूद बारनवापारा अभयारण्य में शिकार को पूरी तरह से रोक पाने में विभाग फेल ही साबित हुआ है।