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Chandra Grahan 2025 7 सितंबर को खून के रंग से सना नजर आएगा चांद, साल का आख्रिरी चंद्रग्रहण, ऐसे गुजरेगा 3.29 घंटे का ग्रहण

Chandra Grahan 2025: साल का दूसरा और अंतिम चंद्र ग्रहण भी इसी महीने लगने वाला है। यह ग्रहण 7 सितंबर की रात पड़ेगा और भारत समेत कई देशों में स्पष्ट रूप से दिखाई देगा।

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7 सितंबर को खून के रंग से सना नजर आएगा चांद (Photo Patrika)

Chandra Grahan 2025: यह महीना ज्योतिषीय और खगोलीय दृष्टिकोण से खास रहने वाला है। इस महीने में कई प्रमुख व्रत-त्योहार तो मनाए ही जाएंगे, साथ ही साल का दूसरा और अंतिम चंद्र ग्रहण भी इसी महीने लगने वाला है। यह ग्रहण 7 सितंबर की रात पड़ेगा और भारत समेत कई देशों में स्पष्ट रूप से दिखाई देगा।

शहर के सिविल लाइंस निवासी पं. पृथ्वीपाल द्विवेदी ने बताया कि यह पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा। इस दिन चांद लाल रंग में नजर आएगा इसलिए इसे ब्लड मून भी कहा जाता है। इस दौरान चंद्रमा लालिमा लिए नजर आएगा। ग्रहण का सूतक काल पूरे भारत में मान्य होगा क्योंकि यह भारत में पूर्ण रूप से दृश्य रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूतक काल के दौरान मंदिरों के द्वार बंद कर दिए जाते हैं और पूजा-पाठ, शुभ कार्य, यात्रा, भोजन आदि वर्जित माने जाते हैं।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस ग्रहण का असर केवल व्यक्तिगत जीवन पर नहीं, बल्कि देश और समाज पर भी पड़ेगा। ज्योतिषियों के मुताबिक, पर्वतीय इलाकों में भूस्खलन की आशंका बढ़ सकती है। कुछ क्षेत्रों में अकाल जैसी परिस्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं। राजनीतिक अस्थिरता और उथल-पुथल की आशंका भी जताई जा रही हैं।

आखिरी चंद्रग्रहण से जुड़ी खास बातें…

यह ब्लड मून होगा, जिसमें चंद्रमा का रंग लालिमा युक्त दिखेगा।

यह साल 2025 का अंतिम चंद्र ग्रहण होगा।

यह भारत में पूरी तरह से दृश्य और मान्य होगा।

चंद्रमा और सूर्य के बीच पृथ्वी के आने से उसकी छाया चंद्रमा पर पड़ती है।

इसी वजह से चंद्रमा का रंग खून की तरह लाल नजर आने लगता है।

ग्रहण काल में क्या न करें? जानिए…

खाना न बनाएं और न ही खाएं।

भगवान की मूर्तियों का स्पर्श न करें।

ग्रहण अवधि में सोने से परहेज करें।

गर्भवती महिलाएं घर से बाहर न निकलें।

नुकीले उपकरण का उपयोग न करें।

नकारात्मक या ऊर्जाहीन जगहों पर न जाएं।

ग्रहण काल के समय क्या करें, जानें…

भगवान के मंत्रों का जाप कर सकते हैं।

ध्यान, साधना और शांति का अभ्यास करें।

जरूरतमंदों को दान पुण्यकारी माना गया है।

तुलसी पत्तों का उपयोग भोजन, जल में करें।

ग्रहण समाप्ति के बाद स्नान, दान-पुण्य करें।

देव दर्शन के लिए आसपास के मंदिर जाएं।

Published on:
04 Sept 2025 10:47 am
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