बलरामपुर

CG Opium Farming: छत्तीसगढ़ बना अफीमगढ़, दुर्ग के बाद अब बलरामपुर में अवैध खेती का खुलासा, दो एकड़ में लगी है फसल

CG Opium Farming: बलरामपुर जिले में भी अफीम की खेती का मामला उजागर हुआ है। कुसमी थाना क्षेत्र के त्रिपुरी गांव में करीब दो एकड़ जमीन पर अफीम की अवैध खेती किए जाने का खुलासा होने से इलाके में हड़कंप मच गया है।

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Mar 10, 2026
CG Opium Farming: छत्तीसगढ़ बना अफीमगगढ़, दुर्ग के बाद अब बलरामपुर में अवैध खेती का खुलासा, दो एकड़ में लगी है फसल

CG Opium Farming: दुर्ग जिले के समोदा गांव में अवैध अफीम की खेती का मामला अभी शांत नहीं हुआ है। यहाँ करीब 7 करोड़ 88 लाख रुपए की अवैध अफीम की फसल तैयार की जा रही थी। इस मामले में प्रसाशन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए खेत में खड़ी पूरी फसल की कटाई शुरू करवा दी है। इस बीच अब बलरामपुर जिले में भी अफीम की खेती का मामला उजागर हुआ है। कुसमी थाना क्षेत्र के त्रिपुरी गांव में करीब दो एकड़ जमीन पर अफीम की अवैध खेती किए जाने का खुलासा होने से इलाके में हड़कंप मच गया है।

जानकारी मिलते ही पुलिस और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है। आपको बता दे कि आदिवासी की जमीन को लीज पर लेकर झारखंड का व्यक्ति अफीम की खेती कर रहा था। प्रशासन की टीम पूरे मामले की जांच कर रही है और इसमें शामिल लोगों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

पौधों को रखा गया सुरक्षित

बता दे कि दुर्ग के समोदा से जब्त किये गए अफीम पौधों को फिलहाल सुरक्षित रखा गया है। इनके नष्टीकरण के लिए पर्यावरण विभाग से अनुमति लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। अनुमति मिलने के बाद अफीम के पौधों को भिलाई इस्पात संयंत्र या किसी औद्योगिक इकाई के फर्नेस में जलाकर नष्ट किया जाएगा।

आरोपियों ने अपनाया था स्मार्ट फार्मिंग मॉडल

शिवनाथ नदी के किनारे स्थित खेतों का चयन सोच-समझकर किया गया था। यहां की रेतीली (सैंडी) मिट्टी और ठंडा वातावरण अफीम की खेती के लिए अनुकूल माना जाता है। वहीं गांव से दूर होने के कारण इस स्थान पर लोगों की आवाजाही भी कम रहती है, जिससे खेती को छिपाकर करना आसान हो जाता है। जांच के दौरान खेत में अफीम के पौधे विभिन्न अवस्थाओं में मिले।

कुछ पौधे जर्मिनेशन स्टेज में तीन-चार इंच ऊंचाई के थे, जबकि कुछ वेजिटेटिव, पिलरिंग, फूटिंग और हार्वेस्टिंग स्टेज में पाए गए। विशेषज्ञों के अनुसार यह तरीका इसीलिए अपनाया गया था, ताकि अलग-अलग समय पर फसल तैयार हो और लगातार कई महीनों तक उत्पादन मिलता रहे।

Published on:
10 Mar 2026 05:08 pm