2 साल पहले भारी बारिश में बह गया था पुल, 2 लोगों के डूबने के बाद मिली थी नाव वह भी हो चुकी है खराब, विधायक ने विधानसभा में उठाया था सवाल
राजपुर. विधानसभा में जिस पुल के निर्माण के लिए विधायक ने आवाज उठाई थी, उसकी सुनवाई न तो विधानसभा में की गई और न ही जिला प्रशासन द्वारा इस तरफ कोई पहल की गई। इसका खामियाजा ग्राम धंधापुर के लोधीडांड व उसके आसपास के कई गांव में रहने वाले लोगों को उठाना पड़ रहा है।
दो वर्ष पूर्व पुल टूट जाने से गांव में रहने वाले बच्चे जान हथेली पर रख उफनती नदी में नाव पर सवार होकर स्कूल जाने को विवश हैं। इसके बावजूद प्रशासन में बैठे जिम्मेदार अधिकारियों की नजर भी इस तरफ नहीं पड़ रही है। शायद इन्हें सकारात्मक पहल के लिए किसी बड़े हादसे का इंतजार है।
जहां आज प्रशासन व शासन विकास के बड़े-बड़े दावे कर रहा है। वहीं राजपुर से करीब 28 किलोमीटर दूर ग्राम धंधापुर के लोधीडांड़ का पुल अगस्त 2016 को बारिश में टूटकर बह गया था। पुल निर्माण की जिम्मेदारी सेतु विकास निगम को दी गई थी। पुल टूटे हुए करीब दो वर्ष हो गए। विभाग के अधिकारी-कर्मचारी मौके पर निरीक्षण करने तक नहीं पहुंचे।
इस पुल को टूटने से लोधीडांड सहित एक दर्जन से अधिक गांव प्रभावित हैं। लेकिन अभी तक शासन व प्रशासन द्वारा इस दिशा में कोई पहल नहीं की गई है। क्षेत्र के विधायक डॉ. प्रीतम राम ने भी सिर्फ विधानसभा में इस मामले को उठाकर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर ली।
इसके बाद उन्होंने कलक्टर को पत्र भी लिखा, लेकिन कभी पुल निर्माण के लिए दबाव बनाने के लिए कोई प्रयास नहीं किया। तात्कालिक कलक्टर अवनीश शरण ने दो वर्ष पूर्व नदी पार करते समय दो लोगों के बह जाने से डूबकर मौत हो जाने पर बनारस से नाव मंगाकर यहां उपलब्ध कराई थी।
नदी पार करते समय दो की मौत के बाद मिला था नाव
ग्राम धंधापुर महान नदी पर बना पुल करीब दो वर्षों से टूटा पड़ा हुआ है। ग्राम परसवार कला महान नदी में दो वर्ष पूर्व नदी पार करते समय अधिक पानी होने के कारण दो युवक बह गए थे। इससे उनकी मौत हो गई थी। लोगों के आक्रोश को देखते हुए तात्कालिक कलक्टर अवनीश कुमार शरण द्वारा पसरवारकला महान नदी के लिए बनारस से नाव मंगाकर दिया गया था।
आज वह देखरेख के अभाव में खराब पड़ा हुआ है। इसे मरम्मत कराने के लिए प्रशासन द्वारा कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इसकी वजह से कई बार स्कूली छात्र-छात्राओं व गांव के लोगों को जान जोखिम में डालकर पानी से पैदल होकर दूसरी तरफ जाना पड़ता है। इससे उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
स्कूल जाते समय रहता है जान का खतरा
दो वर्ष पुल टूटने के बाद बारिश के दौरान गांव के बच्चों को स्कूल जाने के लिए नाव से जाना पड़ता है। कई बार हादसा होने का भी डर बना रहता है। कई छात्र-छात्राएं इसकी वजह से बीच में ही पढ़ाई छोड़ दी हैं। पुल को लेकर प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारियों का जो रवैय्या है, उसे देखकर गांव वालों को यही लग रहा है कि अधिकारियों को किसी न किसी हादसे का इंतजार है। तब ही इनकी आंखें खुलेंगी।
पुल टूटने के दर्जनों गांव के लोग हैं प्रभावित
पुल के टूट जाने से धंधापुर, लोधीडांड, रेवतपुर, शिवपुर, कुंदी, बदोली, दुप्पी चौरा, मरकाडांड, मसगा, करसी, मकनपुर गांव के लोग बारिश में पूरी तरह से प्रभावित हो रहे हैं। अगर गांव में कोई बीमार हो जाता है अथवा किसी प्रकार की परेशानी होती है तो उसे दूसरे तरफ जाने के लिए भी काफी मशक्कत करनी पड़ती है।
कई बार लिखा गया है पत्र
विस में पुल के मामले को मेरे द्वारा उठाया गया था। उसके बाद कलक्टर को कई बार लिखित में पत्र दिया गया है। क्षेत्र में एसईसीएल का खदान भी है। शासन को इससे करोड़ों रुपए की रॉयल्टी भी मिलती है, लेकिन विकास की तरफ कोई ध्यान नहीं देता है।
डॉ. प्रीतम राम, विधायक, सामरी