ECC recruitment scam: बलरामपुर में ECC एजुकेटर भर्ती घोटाले का खुलासा करते हुए पुलिस ने नौकरी पक्की कराने और नियुक्ति पत्र जारी कराने के नाम पर अभ्यर्थियों से वसूली करने वाले दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया कि आरोपी सत्यापन प्रक्रिया का डर दिखाकर ऑनलाइन पैसे ऐंठ रहे थे। पुलिस अब पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी है।
बलरामपुर में ECC एजुकेटर भर्ती प्रक्रिया के दौरान अभ्यर्थियों से नौकरी पक्की कराने और नियुक्ति पत्र जारी कराने के नाम पर पैसे मांगने वाले गिरोह का पुलिस ने खुलासा किया है। कोतवाली देहात पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके पास से मोबाइल फोन बरामद किए हैं। जांच में सामने आया कि आरोपी सत्यापन प्रक्रिया का डर दिखाकर चयनित अभ्यर्थियों से ऑनलाइन रुपये वसूल रहे थे।
बलरामपुर जिले में बेसिक शिक्षा विभाग की ECC एजुकेटर भर्ती से जुड़ा बड़ा मामला सामने आया है। भर्ती प्रक्रिया में चयन सुनिश्चित कराने और नियुक्ति पत्र जारी कराने के नाम पर अभ्यर्थियों से पैसे वसूलने वाले दो लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। मामले के खुलासे के बाद भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठने लगे हैं। जानकारी के अनुसार, 23 मई 2026 को जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय में एक शिकायत दी गई थी। शिकायतकर्ता कामता प्रसाद ने बताया कि ECC एजुकेटर भर्ती में दक्षता परीक्षण पास करने के बाद उन्हें लगातार फोन कॉल आ रहे थे। कॉल करने वाले लोग नियुक्ति पत्र जारी कराने और चयन पक्का करने के बदले रुपये मांग रहे थे।
शिकायत मिलने के बाद कोतवाली देहात थाने में अज्ञात लोगों के खिलाफ बीएनएस और उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम की धाराओं में केस दर्ज किया गया। पुलिस अधीक्षक विकास कुमार के निर्देश पर प्रभारी निरीक्षक गिरिजेश तिवारी की टीम ने मामले की जांच शुरू की। जांच के दौरान पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। उनकी पहचान बलरामपुर के रहने वाले जितेंद्र यादव और लखनऊ निवासी आयुष सिंह के रूप में हुई। पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने कई अहम बातें कबूल कीं। आरोपियों ने बताया कि वे लखनऊ की एक पूर्व सैनिक संस्था में काम करते हैं। इसी संस्था को जीईएम पोर्टल के जरिए ECC एजुकेटर भर्ती में अभ्यर्थियों के सत्यापन का काम मिला था। आरोप है कि दोनों सत्यापन प्रक्रिया का फायदा उठाकर चयनित अभ्यर्थियों को फोन करते थे। नौकरी पक्की कराने के नाम पर रुपये मांगते थे।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि अमित गुप्ता और जान्ह्वी नाम के दो अभ्यर्थियों से ऑनलाइन 20-20 हजार रुपये लिए गए थे। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से घटना में इस्तेमाल मोबाइल फोन भी बरामद किए हैं। फिलहाल पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस गिरोह का नेटवर्क सिर्फ बलरामपुर तक सीमित था या फिर दूसरे जिलों की भर्तियों में भी इसी तरह की वसूली की जा रही थी।