अधिकारियों ने बताया कि मैसूरु रिंग रोड 45 मीटर चौड़ी, छह लेन की सडक़ है, जिसके दोनों ओर सर्विस रोड हैं। प्रस्तावित फ्लाईओवर छह लेन का होगा, जिसकी चौड़ाई 24.5 मीटर होगी। यह जंक्शन उत्तरनहल्ली और हदीनारु जैसे गांवों को जोडऩे वाली राज्य राजमार्ग-210 से भी जुड़ा है, जहां बढ़ते ट्रैफिक के कारण ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
मैसूरु Mysuru रिंग रोड (एनएच-275) के देवलपुर क्रॉस जंक्शन पर प्रस्तावित फ्लाईओवर Flyover निर्माण को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। लोक निर्माण विभाग-राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-पीडब्ल्यूडी), मैसूरु डिवीजन ने इस परियोजना के लिए सडक़ के मध्य बने डिवाइडर पर खड़े लगभग 10 वर्ष पुराने 48 नीम के पेड़ों Neem Tree को हटाने की अनुमति वन विभाग से मांगी है। इन पेड़ों की संभावित कटाई के विरोध में पर्यावरण कार्यकर्ता और नागरिक संगठन सक्रिय हो गए हैं। कुछ कार्यकर्ताओं ने पेड़ों की कटाई के बजाय उन्हें स्थानांतरित करने का सुझाव दिया है।
एनएच-पीडब्ल्यूडी की सहायक अभियंता एच.आर. रूपा ने बताया कि 20.8 करोड़ रुपए की लागत से 800 मीटर लंबे फ्लाईओवर का निर्माण प्रस्तावित है। अधिकारियों के अनुसार, सडक़ परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने इस जंक्शन को ‘ब्लैक स्पॉट’ घोषित किया है, क्योंकि वर्ष 2024 तक के तीन वर्षों में यहां सात घातक और 15 गैर-घातक दुर्घटनाएं दर्ज की गईं। अस्थायी सुधारात्मक उपायों के रूप में रंबल स्ट्रिप्स और संकेतक लगाए जा चुके हैं, जबकि स्थाई समाधान के तौर पर फ्लाईओवर प्रस्तावित है।
अधिकारियों ने बताया कि मैसूरु रिंग रोड 45 मीटर चौड़ी, छह लेन की सडक़ है, जिसके दोनों ओर सर्विस रोड हैं। प्रस्तावित फ्लाईओवर छह लेन का होगा, जिसकी चौड़ाई 24.5 मीटर होगी। यह जंक्शन उत्तरनहल्ली और हदीनारु जैसे गांवों को जोडऩे वाली राज्य राजमार्ग-210 से भी जुड़ा है, जहां बढ़ते ट्रैफिक के कारण ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
उप वन संरक्षक के. परमेश ने कहा कि राज्य पेड़ संरक्षण अधिनियम के तहत सार्वजनिक सुनवाई आयोजित करने का निर्देश दिया गया है। वहीं, पर्यावरणविद बी.आर. गुरुप्रसाद ने बताया कि केआरएस रोड जंक्शन पर 11 पेड़ों का सफलतापूर्वक स्थानांतरण किया जा रहा है और देवलपुर में भी यही मॉडल अपनाया जा सकता है।
मैसूरु ग्राहक परिषद के संस्थापक अध्यक्ष भाम्य वी. शेनॉय ने कहा कि केवल फ्लाईओवर या सडक़ चौड़ीकरण दुर्घटनाओं का समाधान नहीं है, बल्कि लापरवाह और नशे में ड्राइविंग जैसी मूल समस्याओं पर भी ध्यान देना होगा।