राज्य के विभिन्न विभागों, मंडलों और निगमों में लाखों आउटसोर्स कर्मचारी कार्यरत हैं, जिनमें से कई पिछले 15-20 वर्षों से सेवा दे रहे हैं। ऐसे में हर वर्ष कर्मचारियों को हटाने और नए लोगों की नियुक्ति की प्रक्रिया उनके भविष्य को अस्थिर बना देगी और उन्हें असुरक्षा की स्थिति में धकेलेगी।
ऑल इंडिया यूनाइटेड ट्रेड यूनियन सेंटर (एआइयूटीयूसी) ने राज्य सरकार के वित्त विभाग के उस आदेश का कड़ा विरोध किया है, जिसमें आउटसोर्स कर्मचारियों को हर वर्ष बदलने की बात कही गई है। एआइयूटीयूसी ने इस फैसले को कर्मचारी विरोधी और असंवैधानिक बताते हुए इसे तत्काल वापस लेने की मांग की है। यदि सरकार ने इस आदेश को वापस नहीं लिया, तो व्यापक आंदोलन की चेतावनी दी है।
एआइयूटीयूसी All India United Trade Union Centre का कहना है कि राज्य के विभिन्न विभागों, मंडलों और निगमों में लाखों आउटसोर्स कर्मचारी कार्यरत हैं, जिनमें से कई पिछले 15-20 वर्षों से सेवा दे रहे हैं। ऐसे में हर वर्ष कर्मचारियों को हटाने और नए लोगों की नियुक्ति की प्रक्रिया उनके भविष्य को अस्थिर बना देगी और उन्हें असुरक्षा की स्थिति में धकेलेगी। यह आदेश न केवल कर्मचारियों के अधिकारों का उल्लंघन करता है, बल्कि गरिमा के साथ जीवन जीने के मौलिक अधिकार पर भी असर डालता है। एआइयूटीयूसी ने आरोप लगाया कि इस तरह की नीति से कर्मचारियों का शोषण बढ़ेगा और ठेका एजेंसियों को मनमानी करने का अवसर मिलेगा।
एआइयूटीयूसी ने सरकार से आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए सेवा सुरक्षा और वेतन सहित अन्य सुविधाएं सुनिश्चित करने सहित कर्मचारी संगठनों से चर्चा कर न्यायसंगत और मानवीय नीति तैयार करने की अपील की है।