जयपुरंधर मुनि ने कहा कि सम्पूर्ण भारत वर्ष में दीपावली प्रकाश पर्व के रूप में मनाया जाता है।
बेंगलूरु. जयमल जैन श्रावक संघ के तत्वावधन में महावीर धर्मशाला में जयधुरंधर मुनि के सान्निध्य में जयपुरंधर मुनि ने उत्तराध्ययन सूत्र के मूल 35 अध्ययन तक का वांचन किया।
इस अवसर पर सामूहिक जय जाप के साथ दीपावली के विशेष प्रवचन की शुरुआत हुई। जयपुरंधर मुनि ने कहा कि सम्पूर्ण भारत वर्ष में दीपावली प्रकाश पर्व के रूप में मनाया जाता है।
सूर्य, चन्द्र, दीपक बादि से होने वाले द्रव्य प्रकाश से भी ज्यादा जरूरी अपनी आत्मा के भीतर ज्ञान के प्रकाश को जागृत करना है।
जब ज्ञान रूपी प्रकाश व्याप्त हो जाता है तो अज्ञान रूपी अंधकार स्वत: ही दूर हो जाता है। भगवान महावीर ने अपने केवलज्ञान रूपी सूर्य के प्रकाश से इस समस्त जगत को आलोकित किया है।
भगवान महावीर के निर्वाण के बाद उनके द्वारा प्ररूपित उपदेशों को हृदयंगम करते हुए उनका अनुसरण करना ही सच्ची श्रद्धांजलि है। 35 श्रावक-श्राविकाओं ने तेले तप की आराधना की।
गुरुवार को जयधुरंधर मुनि के तेले तप की मौन साधना एवं उत्तराध्ययन सूत्र की पूर्णाहुति के साथ सुबह साढ़े आठ बजे महामांगलिक होगा।