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जवाहरलाल नेहरू पर बयान से बौखलाई कांग्रेस, कर्नाटक में BJP नेता पर केस दर्ज, हाई कमान ने क्या दिया ऑर्डर?

भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू पर बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव बीएल संतोष के विवादित बयान ने राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है।

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Congress High Command

कांग्रस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पार्टी नेता केसी वेणुगोपाल। (फोटो- ANI)

भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू पर बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव बीएल संतोष के विवादित बयान ने राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है।

कांग्रेस ने नेहरू पर कथित टिप्पणी को लेकर भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव बीएल संतोष के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है।

इसके अलावा, कर्नाटक में सोशल मीडिया के माध्यम से गलत जानकारी फैलाने वाले अन्य भाजपा नेताओं पर एक्शन लेने को कहा गया है।

घटना क्या है?

कांग्रेस नेताओं ने गुरुवार को बेंगलुरु के हाई ग्राउंड्स पुलिस स्टेशन में बीएल संतोष के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। आरोप है कि संतोष ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर की, जिसमें दावा किया गया कि नेहरू ने संसद में वीडी सावरकर को श्रद्धांजलि देने से रोका था। इस पर कांग्रेस का कहना है कि यह पूरी तरह गलत और जानबूझकर फैलाई गई अफवाह है।

तथ्य क्या कहते हैं?

नेहरू का निधन 27 मई 1964 को हो गया था, जबकि सावरकर की मृत्यु फरवरी 1966 में हुई। ऐसे में नेहरू के समय में सावरकर को श्रद्धांजलि का सवाल ही नहीं उठता। कांग्रेस नेताओं ने इसे साफ तौर पर इतिहास से छेड़छाड़ बताया।

कांग्रेस की मांग

कांग्रेस ने सिर्फ शिकायत ही नहीं की, बल्कि कर्नाटक सरकार से अपील की है कि सोशल मीडिया पर कांग्रेस नेताओं, स्वतंत्रता सेनानियों और देश के इतिहास के खिलाफ फैलाई जा रही गलत खबरों, अपमानजनक पोस्ट और प्रोपगैंडा पर सख्त कानूनी कार्रवाई हो। पार्टी का कहना है कि ऐसे बयान देश की एकता को तोड़ते हैं और युवा पीढ़ी को गलत दिशा देते हैं।

भाजपा ने क्या कहा?

बीजेपी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन कांग्रेस इसे चुनावी रणनीति का हिस्सा बता रही है। कई कांग्रेस नेता कह रहे हैं कि जब बीजेपी के पास विकास का मुद्दा नहीं बचता तो वह पुरानी घटनाओं और नेताओं को निशाना बनाती है।

क्या कह रहे कांग्रेस नेता?

इस विवाद पर कांग्रेस नेताओं का कहना है कि नेहरू भारत के पहले प्रधानमंत्री थे जिन्होंने देश को आधुनिक बनाने की दिशा में कई कदम उठाए। चाहे शिक्षा हो, विज्ञान हो या औद्योगीकरण, उनकी भूमिका को नकारा नहीं जा सकता।

वहीं सावरकर भी स्वतंत्रता आंदोलन के एक महत्वपूर्ण चेहरा रहे। लेकिन दोनों के बीच की घटनाओं को तोड़-मरोड़कर पेश करना सही नहीं है।

कांग्रेस कार्यकर्ता कह रहे हैं कि अगर कोई नेता गलती करता है तो उसे माफी मांगनी चाहिए, न कि और ज्यादा विवाद खड़ा करना चाहिए। इस मामले पर कर्नाटक पुलिस अब जांच कर रही है।