देश में अंतरिक्ष के क्षेत्र का एक लंबा इतिहास रहा है। आर्यभट्ट के समृद्ध ज्ञान भंडार ने इसरो के लिए एक मजबूत नींव रखी। आर्यभट्ट ने ग्रहों की गति, पृथ्वी की दूरी और चौड़ाई की सटीक पहचान की थी। इसी प्रकार, वराहमिहिर, ब्रह्मगुप्त, भास्कर आदि जैसे अन्य खगोलविदों को भी गणित का उत्कृष्ट ज्ञान था, जो इसरो को आगे बढ़ाने में उपयोगी साबित हुआ।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) और कर्नाटक राज्य मुक्त विश्वविद्यालय (केएसओयू) ने अपने सभागार में राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस मनाया। इसरो द्वारा डिजाइन किए गए उपग्रहों और रॉकेटों के लघु मॉडल प्रदर्शित किए गए।
इसरो के टेलीमेट्री, ट्रैकिंग और कमांडिंग नेटवर्क के उप निदेशक एम.आर. राघवेंद्र ने आर्यभट्ट से गगनयान : प्राचीन ज्ञान से अनंत संभावनाओं तक विषय पर व्याख्यान दिया।
उन्होंने कहा, देश में अंतरिक्ष के क्षेत्र का एक लंबा इतिहास रहा है। आर्यभट्ट के समृद्ध ज्ञान भंडार ने इसरो के लिए एक मजबूत नींव रखी। आर्यभट्ट ने ग्रहों की गति, पृथ्वी की दूरी और चौड़ाई की सटीक पहचान की थी। इसी प्रकार, वराहमिहिर, ब्रह्मगुप्त, भास्कर आदि जैसे अन्य खगोलविदों को भी गणित का उत्कृष्ट ज्ञान था, जो इसरो को आगे बढ़ाने में उपयोगी साबित हुआ। इसरो का चंद्रयान मिशन, आदित्य एल1 और कई अन्य अंतरिक्ष कार्यक्रम, ज्ञान के इतिहास की देन हैं। 2050 तक कई परियोजनाएं प्रस्तावित हैं, जिनमें अंतरिक्ष स्टेशन, गगनयान, शुक्र और चंद्रमा का अध्ययन व अंतरिक्ष व चंद्रमा पर मानव मिशन शामिल हैं।
मैसूरु विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एन. के. लोकनाथ ने कहा कि इन कार्यक्रमों से छात्रों को वैज्ञानिकों की कार्यप्रणाली की समझ विकसित करनी होगी तथा एयरोस्पेस क्षेत्र की प्रगति में योगदान देना होगा।इस अवसर पर केएसओयू के कुलपति प्रो. शरणप्पा वी. हाल्से, कुलसचिव प्रो. एस.के. नवीन कुमार और विश्व अंतरिक्ष सप्ताह की वैकल्पिक समिति के अध्यक्ष जसविंदर सिंह खोरल उपस्थित थे।