
बेंगलूरु. राजस्थान जैन मूर्तिपूजक संघ, जयनगर में प्रवचन देते हुए आचार्य देवेंद्रसागर सूरी ने कहा कि हमारा जीवन दुखी एवं कठिन इसलिए है कि हम समस्याओं का सामना करने और उन्हें सुलझाने को एक पीड़ादायक व कष्टकारक प्रक्रिया मानते हैं जबकि ऐसा नहीं होता। समस्याएं हैं तो उनका समाधान भी होता ही है।
समस्याओं को आप किस नजरिए से देखते हैं, उसी आधार पर उनके समाधान भी सरल या जटिल प्रतीत होते हैं। मुश्किलें वे औजार हैं जिनसे ईश्वर हमें बेहतर कामों के लिए तैयार करता है।
आचार्य ने कहा कि आकाश वर्षा में गीला नहीं होता, धूप में गर्म नहीं होता और सर्दी में ठिठुरकर कपड़ा नहीं ओढ़ता, क्योंकि आकाश वर्षा, सर्दी, गर्मी से अतीत है। उस पर इनका प्रभाव नहीं होता, जबकि हमारी चमड़ी पर इनका असर होता है। समस्याएं आकाश की तरह बनने पर ही मिट सकती हैं, मिटाई जा सकती हैं, किंतु यदि हम केवल चर्ममय रह जाएंगे तो समस्याएं कभी नहीं सुलझने वाली हैं।
अनंतकाल बीत गया किंतु समस्याओं का कभी अंत हुआ हो, ऐसा नहीं दिखाई देता। जब तक मनुष्य है, उसके पास चिंतन और विचार हैं तब तक समस्याएं रहेंगी।