जिन लोगों को बाल विवाह के बारे में पहले से जानकारी है, उन्हें यह सुनिश्चित करने के लिए सतर्क रहना चाहिए कि वैध आयु से कम आयु के किसी भी बच्चे का विवाह न हो। ऐसे मामलों की पहचान करने के लिए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने और परिवार के सदस्यों के लिए कानूनी परिणामों के बारे में जागरूकता पैदा करके बाल विवाह को रोकने के लिए कदम उठाने के लिए ग्राम-स्तरीय समितियां बनाई जानी चाहिए।
-बच्चों को अपराध और शोषण से बचाना सबकी जिम्मेदारी
बेंगलूरु.
कर्नाटक राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग (केएससीपीसीआर) के अध्यक्ष के नागन्ना गौड़ा ने कल्याण कर्नाटक kalyaan karnataka क्षेत्र में बाल विवाह Child Marriage की समस्या को रोकने के लिए विभिन्न विभागों के अधिकारियों के बीच समन्वय बढ़ाने की महत्वपूर्ण आवश्यकता पर बल दिया है।उन्होंने कहा कि बाल विवाह रोकने की जिम्मेदारी सिर्फ महिला एवं बाल कल्याण विभाग या पुलिस विभाग की नहीं है बल्कि संबंधित प्रत्येक अधिकारी और लोगों से निकटता से जुड़े लोगों जैसे आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, आशा कार्यकर्ता, शिक्षक, ग्राम लेखाकार और पंचायत विकास अधिकारी की भी है।
वे कलबुर्गी संभाग के सभी जिलों के जिला और तालुक स्तर के अधिकारियों के लिए बाल संरक्षण निदेशालय, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, जिला प्रशासन, महिला एवं बाल कल्याण विभाग, स्कूल शिक्षा विभाग, जिला बाल संरक्षण इकाई और गुलबर्गा विश्वविद्यालय द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे।
गौड़ा ने कहा, जिन लोगों को बाल विवाह के बारे में पहले से जानकारी है, उन्हें यह सुनिश्चित करने के लिए सतर्क रहना चाहिए कि वैध आयु से कम आयु के किसी भी बच्चे का विवाह न हो। ऐसे मामलों की पहचान करने के लिए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने और परिवार के सदस्यों के लिए कानूनी परिणामों के बारे में जागरूकता पैदा करके बाल विवाह को रोकने के लिए कदम उठाने के लिए ग्राम-स्तरीय समितियां बनाई जानी चाहिए।
हाल के वर्षों में बाल शोषण Child abuse के बढ़ते मामलों पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति का यह कर्तव्य है कि वह यह सुनिश्चित करे कि बच्चे अपराध और शोषण से सुरक्षित रहें।
26 लाख बच्चे सरकारी छात्रवृत्ति, अन्य लाभों से वंचित
केएससीपीसीआर के सदस्य शशिधर कोसम्बे ने कहा कि कल्याण कर्नाटक क्षेत्र के छह लाख बच्चों सहित लगभग 26 लाख बच्चे सरकारी छात्रवृत्ति और अन्य लाभों से वंचित रह गए हैं, क्योंकि अधिकारी उनके आधार को एसएटीएस (स्टूडेंट अचीवमेंट ट्रैकिंग सिस्टम) डेटा के साथ जोडऩे में विफल रहे हैं। शिक्षा विभाग के सचिव ने 21 जनवरी को सभी उप निदेशकों को पत्र लिखकर निर्देश दिया कि वे इस मुद्दे को जल्द से जल्द हल करें।उन्होंने कहा, जागरूकता और प्रवर्तन की कमी के कारण बाल विवाह निरोधक अधिनियम, 1929 बाल विवाह रोकने में अप्रभावी रहा है। उन्होंने अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्राधिकार में बाल विवाह रोकने के लिए कड़े कदम उठाने के निर्देश दिए।
शशिधर के अनुसार राज्य में लगभग 3,800 बच्चों का शिक्षकों, स्कूल वैन चालकों या करीबी रिश्तेदारों द्वारा यौन शोषण किया गया है।