10.9 करोड़ रुपए की थी लेकिन इसे 48 करोड़ रुपए में बेचा गया था और वित्तीय वर्ष 2017 में उसे 14.78 करोड़ रुपए का घाटा हुआ।
बेंगलूरु. महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने केंद्रीय ऊर्जा मंत्री रहते पीयूष गोयल द्वारा किए गए कुछ वित्तीय लेन-देन की जांच की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि गोयल और उनकी पत्नी की स्वामित्व वाली एक कंपनी फ्लैशनेट इंफो सोल्यूशंस (इंडिया) को 48 करोड़ में बेचा गया था और इससे जुड़े तथ्य छुपाए गए थे। प्रधानमंत्री कार्यालय को इसकी जांच करनी चाहिए।
यहां शनिवार को पत्रकारों से बातचीत करते हुए चव्हाण ने कहा कि नवम्बर 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंत्रिपरिषद के सभी सदस्यों से 48 घंटे के भीतर अपनी परिसंपत्तियां घोषित करने को कहा था। हालांकि, पीयूष गोयल ने अपनी संपत्तियों का ब्यौरा सौंपा लेकिन सुविधाजनक तरीके से फ्लैशनेट इंफो सोल्यूशंस में निदेशक के तौर पर अपनी और अपनी पत्नी सीमा गोयल से जुड़ी जानकारियां छुपा गए। गोयल 25 नम्बर 2004 से 26 मई 2014 तक इस कंपनी के निदेशक रहे जबकि सीमा गोयल 1 अप्रेल 2009 से 26 मई 2014 तक निदेशक रहीं। उन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल में वर्ष 2014 में शामिल किया गया और ऊर्जा तथा नवीनीकृत ऊर्जा मंत्रालय मिला। मंत्री बनने पर उन्होंने निदेशक पद छोड़ दिया लेकिन कंपनी के मालिक बने रहे। यह कंपनी सितंबर 2014 में पिरामल समूह को बेच दी गई लेकिन आय से जुड़ी जानकारियां पीएमओ को नहीं दी गई। यह कंपनी 48 करोड़ में बेची गई थी। चव्हाण ने कहा कि पिरामल समूह का ऊर्जा क्षेत्र में काफी रुचि रहा है और गोयल का यह कदम हितों के टकराव का मामला बनता है।
10.9 करोड़ की कम्पनी को 48 करोड़ में बेचा
गोयल की स्वामित्व वाली कंपनी केवल 10.9 करोड़ रुपए की थी लेकिन इसे 48 करोड़ रुपए में बेचा गया था। बिक्री के बाद कंपनी का नाम आसान इंफो सोल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड होगया और वित्तीय वर्ष 2017 में उसे 14.78 करोड़ रुपए का घाटा हुआ। इसके बाद पिरामल परिवार को कंपनी से इस्तीफा देना पड़ा। उन्होंने सवाल किया कि नवीनीकृत ऊर्जा कारोबार करने वाले पिरामल समूह ने आखिर क्यों इतनी बड़ी रकम लगाकर गोयल की स्वामित्व वाली कंपनी खरीदा। यह हितों के टकराव का मामला है और पीएमओ को इसकी जांच करानी चाहिए।
भ्रष्ट और अपराधी नेताओं को प्रश्रय दे रही बीजेपी
चव्हाण ने कहा कि राज्यों में सबसे अच्छा बजट सिद्धरामय्या सरकार का था और यह राज्य वित्तीय रूप से सबसे सुदृढ़ राज्यों में से एक है। अमित शाह तथ्यों को जाने बगैर जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं जबकि खुद अपनी पार्टी में भ्रष्ट और अपराधी नेताओं को प्रश्रय दे रहे हैं। त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति में जद (ध) के साथ गठबंधन के सवाल पर चव्हाण ने कहा कि कांग्रेस अपने बूते पर यहां सरकार बनाएगी। जद (ध) से गठबंधन का सवाल ही पैदा नहीं होता।
भाजपा के खिलाफ गठबंधन जरूरी
उन्होंने कहा कि अगले वर्ष महाराष्ट्र में होने वाले राज्य विधानसभा चुनावों में भाजपा के खिलाफ गठबंधन अवश्यंभावी है। समान विचारधारा वाली पार्टियां साथ आएंगी। हालांकि, अभी महाराष्ट्र चुनाव में 18 महीने का समय है लेकिन काफी संभावना है कि चुनाव समय से पहले ही हो जाएं। लोकसभा चुनाव भी अगर समय से पहले हुए तो कोई आश्चर्य नहीं। एनडीए के सहयोगी प्रधानमंत्री की कार्यप्रणाली और उनके निरंकुश व्यवहार से नाराज होकर अलग हो रहे हैं।