व्यापारियों ने कहा, इससे कोई समाधान नहीं निकलेगा
बेंगलूरु. कोरोना का संक्रमण रोकने के लिए सीलडाउन किए गए चिकपेट बाजार सहित आसपास के बाजारों में शुक्रवार को भी सन्नाटा पसरा रहा।
जहां तक व्यापारियों का सवाल है, वे सीलडाउन सहित तमाम व्यवस्था व नियमों का पालन करने के लिए तैयार हैं। व्यापारियों का मानना है कि चिकपेट या किसी एक-दो बाजार को बंद करने से कोरोना वायरस का समाधान नहीं होगा, उल्टे इससे सरकार को राजस्व की हानि होगी। व्यापारियों को पहले से हो रहा आर्थिक नुकसान और बढ़ेगा और ढेर सारे लोगों के सामने रोजी-रोटी का संकट और गम्भीर हो जाएगा।
सीलडाउन कोई समाधान नहीं
एफकेसीसीआई के अध्यक्ष सीआर जनार्दन कहते हैं, लॉकडाउन या सीलडाउन कोई समाधान नहीं है। इससे कुछ नहीं होगा। ऐसा भी नहीं है कि मरीजों की संख्या एकदम से बढ़ रही है। अब सैम्पल ज्यादा लिए जा रहे हैं जिसकी वजह से मरीजों की संख्या भी ज्यादा दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि कितनी अजीब बात है कि एक ओर सरकार तमाम उद्योग-धंधों को राहत देते हुए पैकेज जारी कर रही है वहीं दूसरी ओर अनावश्यक रूप से कारोबार बंद करवाया जा रहा है। जब कोरोना की दवा मिल रही है तो बाजार को बंद करवाने का क्या औचित्य है। कर्नाटक में तो भारी संख्या में लोग डिस्चार्ज भी हो रहे हैं। मेरा अनुरोध है कि सरकार बंद करने के बारे में सोचे ही नहीं, क्योंकि इससे कुछ नहीं होगा। किसानों, मजदूरों, कामगारों, नौकरीपेशा लोगों को बेहद मुश्किल होगी।
कोरोना चिकपेट से थोड़ी फैल रहा
वहीं कर्नाटक हौजरी एंड गारमेंट एसोसिएशन के उपाध्यक्ष पीएस राजपुरोहित ने सवालिया लहजे में कहा कि आखिर हमें शांति से व्यापार क्यों नहीं करने दिया जा रहा। सरकार ने जो भी नियम बनाए, हम उनका पालन कर रहे हैं। हम सीधे- सादे व्यापारी हैं, व्यापार करना चाहते हैं। कोरोना कोई चिकपेट से थोड़ी फैल रहा है। इस बंदी के चक्कर में दुकानों का किराया देना मुश्किल हो रहा है। सरकार को भी राजस्व का भारी नुकसान है। हम सरकार के साथ लेकिन सीलडाउन के विरोध में है। सरकार को पुनर्विचार करना चाहिए। सामाजिक दूरी बरतने और मास्क पहनने जैसे नियमों को सख्ती से लागू कीजिए लेकिन बाजार बंद करना ठीक नहीं कहा जा सकता।
उन्होंने कहा कि यदि एक-दो दिन के लिए बंद किया भी है तो इस अवधि क का उपयोग करते हुए पूरे इलाके को सैनेटाइज किया जाना चाहिए।
व्यावसायिक तंत्र के साथ खिलवाड़
ट्रेड एक्टिविस्ट सज्जनराज मेहता भी समूचे चिकपेट को सीलडाउन के फैसले को तर्कसंगत नहीं मानते। वे कहते हैं कि एक ओर प्रधानमंत्री से लेकर तमाम बड़े नेता कहते हैं कि कोरोना के साथ जीवन जीना है दूसरी ओर नियमों का पालन करने और सरकार का खजाना भरनेवाले चिकपेट के व्यापारियों के व्यापार पर रोक लगाई जा रही है। आखिर यह सीलडाउन व्यापारियों के साथ सौतेला व्यवहार नहीं तो और क्या है? सवाल यह है कि इससे हासिल क्या होगा। व्यापारी तो सदैव सरकार के साथ हैं लेकिन सरकार फैसले तो सोच-समझकर ले। शहर के व्यावसायिक हृदय चिकपेट के व्यावसायिक तंत्र के साथ यह खिलवाड़ निंदनीय है।
पहले सूचना तो देनी चाहिए
इलेक्ट्रिकल मर्चेन्ट एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष मानकचंद लुंकड़ को इस बात का मलाल है कि इतना बड़ा फैसला बिना सूचना के लिया गया। वे कहते हैं कि ऐसा लगता है, बीबीएमपी ने यह फैसला बिना सोचे-विचारे लिया है। इससे किसी का हित नहीं होगा बल्कि व्यापारियों के साथ ही उनके यहां काम करनेवाले लोगों को भी भारी परेशानी होगी। माल ट्रांसपोर्ट में पड़ा रहेगा। जो बिल कल बना था, आज माल भेज नहीं पाए। बैंक से लेन-देन रहता है, उसका क्या करें। दुकान का भाड़ा देना है। किसी को मालूम नहीं था कि कल से सीलडाउन होने वाला है। पहले सूचना तो देनी चाहिए थी। ताकि दुकानदार कुछ व्यवस्था कर सकें। हम तो न घर के रहे न घाट के।