बैंगलोर

कीचड़ रूपी संसार में आत्मा कमल की भांति

यह तब तक संभव नहीं होगा जब तक हम अपने स्वभाव को दूसरों के हित के लिए नहीं बदलेंग
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Updated: 13 Oct 2018, 5:44 PM IST
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कीचड़ रूपी संसार में आत्मा कमल की भांति

मैसूरु. वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ, सिद्धार्थनगर सीआइटीबी परिसर में श्रुत मुनि ने कहा कि कीचड़ रूपी संसार में आत्मा कमल की भांति कहलाई गई है। संसार में मोह, माया, लोभ भरे हुए हैं लेकिन आत्मा को मोती के समान इस कीचड़ में कमल की भांति हमको खिलाना है। उन्होंने कहा कि जैसा हमारा स्वभाव होगा जीवन में भी वैसा ही प्रभाव होगा। हमारा स्वभाव अच्छा है या नहीं लेकिन सभी पर हमारा प्रभाव चाहते हंै, लेकिन यह तब तक संभव नहीं होगा जब तक हम अपने स्वभाव को दूसरों के हित के लिए नहीं बदलेंग।

मुनि ने कहा कि घर में भी अगर काल के अनुसार हम स्वभाव नहीं बदलेंगे तो घर में अशांति फैलेगी। अशांति में लक्ष्मी का वास नहीं होता है। इस अवसर पर चेन्नई से करीबन 60 श्रावक-श्राविकाएं एवं केजीफ से भी दर्शनार्थी उपस्थित रहे। शुक्रवार को पांच दिवसीय बाल संस्कार शिविर शुरू हुआ। रविवार को सर्व कार्य सिद्धि जाप अनुष्ठान किया जाएगा।

कर्मों का स्वरूप जानना जरूरी
मैसूरु. महावीर भवन में जैनाचार्य विजय रत्नसेन सूरीश्वर ने कहा कि आत्महित की इच्छुक आत्मा को आत्म पर लगे हुए कर्मों का ज्ञान जरुरी है। जब तक शत्रु का परिचय नहीं होता, तब तक उसके साथ युद्ध करके उस पर विजय पाना असंभव है। वैसे ही, आत्मा के अनादिकाल के शत्रु ज्ञानावरणीय आदि आठ कर्मों का स्वरूप और स्वभाव जानना जरूरी है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक आत्मा के इर्द गिर्द असंख्य कर्म के परमाणु रहे हुए हैं। जब आत्मा राग द्वेष करती है तब आत्मा का कर्म से संयोग होकर, कर्म और आत्मा एकमेक हो जाती है।

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राठौड़ सचिव बने
मैसूरु. सुमतिनाथ जैन श्वेताबर मूर्तिपूजक संघ के ट्रस्ट मंडल की आम सभा गुरुवार को महावीर भवन में हुई। सर्वसम्मति से भैरुमल राठौड़ को सचिव मनोनीत किया गया। राठौड़ ने संघ के सदस्यों के प्रति आभार जताया। वे सिरोही जिला दशा ओसवाल संघ, मैसूरु के अध्यक्ष भी हैं।

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13 Oct 2018, 5:44 PM IST
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