बैंगलोर

पुजारी बनने को तैयार दलित युवा

पड़ोसी राज्य केरल की पहल के साथ कदमताल करते हुए राज्य सरकार ने भी देवस्थानम विभाग के मंदिरों में दलित वर्ग के पुजारियों की नियुक्ति

2 min read
Dec 03, 2017
priests

बेगलूरु. पड़ोसी राज्य केरल की पहल के साथ कदमताल करते हुए राज्य सरकार ने भी देवस्थानम विभाग के मंदिरों में दलित वर्ग के पुजारियों की नियुक्ति की जो प्रक्रिया शुरू की है, उसे इस वर्ग के युवाओं से अच्छी प्रतिक्रिया मिली है। दलित वर्ग से कुछ युवकों ने आगम शाला में नामांकन करवाया है। नियमानुसार पुजारी नियुक्त होने के लिए इच्छुक उम्मीदवारों को पहले आगम शाला में पढ़ाई पूरी करनी होती है उसके बाद ही उन्हें इस सेवा के लिए अभिप्रमाणित किया जाता है।

इससे पहले जब विभाग ने दलित वर्ग से पुजारियों की नियुक्ति का रास्ता साफ किया था तो शुरुआती वर्षों में इस समुदाय से किसी ने भी आगम शास्त्रों की शिक्षा ग्रहण करने की इच्छा नहीं जताई थी। मगर अब केरल में मंदिरों में दलित पुजारियों की नियुक्ति के बाद युवाओं में विश्वास जगा है और वे आगम शालाओं में प्रवर, प्रवीण और विद्वत प्रारूप की शिक्षाएं ग्रहण कर रहे हैं। यह पूरा पाठ्यक्रम पांच साल का होगा।

प्रदेश में संचालित ३८ आगम शालाओं में पुजारियों के पाठ्यक्रम के तहत दक्षता हासिल करने के लिए १८ से ४० साल आयु वर्ग के लोग नामांकन कर सकते हैं। देवस्थानम विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अब लगभग सभी नामांकनकर्ता ब्राह्मण वर्ग से ताल्लुक रखते रहे हैं।

शायद यह परम्परागत झिझक अथवा सामाजिक दबाव था कि दलित वर्ग के युवा आगम शास्त्र पाठ्यक्रम में दाखिला नहीं लेते थे, मगर अब आगम शालाओं में कुछ दलित वर्ग के छात्र हैं जो पढ़ाई कर रहे हैं। राज्य सरकार इस बात को दोहराती रही है कि मंदिरों में पुजारी के पद पर काम करने के लिए सभी जाति, वर्ग के लोगों का स्वागत है।

जाति नहीं पंडित के रूप पहचाना जाएगा
देवस्थानम मंत्री रुद्रप्पा लामाणी ने कहा कि हाल ही में उडुपी में हुई धर्म संसद के दौरान बहुत से संतों ने मंदिरों में दलितों का अभिनंदन किया था। इससे पूर्व तक दलितों को अस्पृश्य माना जाता था। अब जब धार्मिक नेता एक कदम आगे बढ़ा सकते हैं तो हम धर्मनिरपेक्ष सरकार के तौर पर दो कदम आगे बढ़ेंगे। जो लोग मंदिरों में पूजा करेंगे, उन्हें किसी जाति के तौर पर नहीं वरन आगम शास्त्र पंडित के रूप में पहचाना जाएगा।

सरकारी मंदिरों में १.२ लाख पुजारी
जानकारी के अनुसार देवस्थानम विभाग ३४ हजार से अधिक मंदिरों का प्रबंधन करता है, जिनमें करीब १.२ लाख पुजारी कार्यरत हैं। अन्य विभागों की अपेक्षा यहां पुजारियों की नियुक्ति की प्रक्रिया अलग है। किसी पुजारी की मृत्यु अथवा बुढ़ापे के कारण रिक्त पदों पर नियुक्तियां होती हैं।

कुछ मंदिरों में पुजारी के पद पर एक ही परिवार के सदस्य नियुक्त होते रहे हैं। यहां अनुसूचित जाति, जनजाति अथवा अन्य पिछड़ा वर्ग से कोई आवेदक न होने के कारण किसी प्रकार के आरक्षण की व्यवस्था नहीं है। ऐसा प्रतीत होता है कि परम्परागत समुदाय के युवा वर्ग पुजारी के रूप में काम करने के इच्छुक नहीं हैं। ऐसे में रिक्तियां हो रही हैं। अब विभाग ने आगम शिक्षा प्रमाणन को बुनियादी योग्यता तय कर दिया है। इस तरह इस पाठ्यक्रम की शिक्षा ग्रहण कर रहे सभी वर्ग के लोगों को पुजारी नियुक्त किया जाएगा।

Published on:
03 Dec 2017 04:43 am
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