
बेंगलूरु. दो गांवों के बीच एक भैंसे के स्वामित्व को लेकर उलझा मामला अंतत: स्थानीय मठ प्रमुख के हस्तक्षेप के बाद सुलझ गया और अब भैंसे का डीएनए टेस्ट नहीं होगा। दावणगेरे जिले के बेलिमल्लूर और शिवमोग्गा जिले के हारहल्ली गांव के लोग पिछले कई दिनों से भैंसे के स्वामित्व को लेकर उलझे हुए थे। मामला पुलिस तक पहुंचा और स्वामित्व का पता लगाने के लिए भैंसे और उसको जन्म देने वाली भैंस का डीएनए टेस्ट कराने का निर्णय हुआ। हालंाकि, भैंसे के डीएनए टेस्ट को लेकर कई ग्रामीण तैयार नहीं थे। अंतत: स्वामित्व विवाद निपटाने में होन्नली टाउन के हेरिकल मठ के ओडेयार चन्नमल्लिकार्जुन स्वामी ने हस्तक्षेप किया। दोनों गांव के लोग इस मठ के श्रद्धालु हैं। उन्होंने ग्रामीणों को समझाया कि भैंसे को लेकर झगड़ा करना उचित नहीं है। साथ ही डीएनए टेस्ट के लिए भैंसे का खून लिया जाएगा जो धार्मिक मान्यता के तहत अनुचित है।
स्वामी के समझाने पर दोनों गांव के लोगों ने तय किया कि वे भैंसे का डीएनए टेस्ट नहीं कराएंगे। ग्रामीणों ने माना कि जो भी दोषी होगा, उसे देवी मरिकंबा सजा देंगी। साथ ही हारनहल्ली के लोगों ने भैंसे को बेलिमल्लूर गांव को सौंपने का निर्णय किया। पूर्व में यह भैंसा बेलिमल्लूर गांव के मंदिर को सौंपा गया था, जो दो वर्ष पूर्व लापता हो गया था। कुछ समय पूर्व हारनहल्ली गांव में लापता भैंसे की तरह दिखने वाला एक भैंसा दिखा जिस पर बेलिमल्लूर गांव के लोगों ने दावा किया।
मामला इतना उलझा कि लोग डीएनए टेस्ट से स्वामित्व का पता लगाने को तैयार थे, लेकिन इस बीच मठ के हस्तक्षेप से मामले का सौहार्दपूर्ण समाधान निकल गया। दावणगेरे एसपी हनुमंतरय्या ने कहा कि दोनों गांवों के बीच सौहार्दपूर्ण समाधान हो गया है, इसलिए अब डीएनए टेस्ट नहीं होगा। वहीं ग्रामीणों का मानना है कि भैंसा मंदिर को सौंपा गया था, इसलिए यह एक ‘पवित्र’ भैंसा है। अगर इसका खून निकाला जाएगा तो यह इसकी पवित्रता से समझौता होगा और इससे देवी मरिकंबा नाराज होंगी।