गृह विभाग संभाल रहे उपमुख्यमंत्री बोले, अभी ऐसी नौबत नहीं आई
बेंगलूरु. भले ही आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआइ) के लिए दरवाजे बंद कर दिए हैं लेकिन राज्य में ऐसा नहीं होगा।
गृह मंत्री का दायित्व संभाल रहे उप मुख्यमंत्री डॉ. जी. परमेश्वर ने स्पष्ट किया कि कर्नाटक में सीबीआइ को काम करने की पूर्ण स्वतंत्रता होगी।
बेलगावी में शनिवार को पत्रकारों से बातचीत करते हुए परमेश्वर ने कहा कि राज्य सरकार सीबीआइ के लिए दरवाजा बंद करने का कोई इरादा नहीं रखती है।
ऐसी नौबत अभी नहीं आई है। उन्होंने कहा कि आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल ने ऐसे निर्णय किए हैं लेकिन राज्य की परिस्थितियां सीबीआइ के लिए दरवाजे बंद करने की मांग नहीं करती।
चंद्रबाबू नायडू के निर्णय पर आश्चर्य जताते हुए कहा कि उन्हें नहीं पता कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि आंध्र प्रदेश सरकार ने यह कह दिया कि सीबीआई अधिकारियों को आधिकारिक काम के लिए भी राज्य में प्रवेश करने से पहले अनुमति लेनी होगी।
यहां तो ऐसा कुछ महसूस नहीं हो रहा है जो ऐसी अधिसूचना जारी की जाए। दरअसल, कानून-व्यवस्था का मामला राज्य सरकार के अंतर्गत आता है और केंंद्रीय सीबीआइ को किसी राज्य में कार्रवाई के लिए अनुमति लेनी पड़ती है।
हालांकि, अगर उच्च न्यायालय या उच्चतम न्यायालय किसी मामले में सीबीआइ जांच का आदेश देता है तो फिर यह राज्य सरकार का मसला नहीं होता।
विवादों में घिरी सीबीआइ के लिए आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल ने सामान्य सहमति वापस लेकर दरवाजे बंद कर दिए हैं लेकिन अगर इन राज्यों में मौजूद केंद्र सरकार के किसी कार्यालय में कोई भ्रष्टाचार होता है तो वहां सीबीआई अपना काम करती रहेगी।
हालांकि, तेलुगू देशम पार्टी (टीडीपी) के नेतृत्व वाली सरकार ने कहा है कि आंध्र प्रदेश में किसी केंद्र सरकार के कर्मचारी के खिलाफ भ्रष्टाचार की जांच, या निजी व्यक्ति की जांच के लिए प्रवेश से पहले अनुमति लेनी होगी।
गौरी लंकेश हत्याकांड के मिले हैं पक्के सबूत
इस बीच परमेश्वर ने कहा कि पत्रकार व सामाजिक कार्यकर्ता गौरी लंकेश हत्याकांड मामले में पुलिस के पास इस मामले में पक्के सबूत है। संदेह है कि गौरी लंकेश, एमएम कलबुर्गी, नरेंद्र दाभोलकर और गोविंद पंसारे की हत्या एक ही समूह के सदस्यों ने की है।