
मैसूरु. स्थानकवासी जैन संघ के तत्त्वावधान में चातुर्मास के लिए सिटी स्थानक में विराजित डॉ समकित मुनि ने 'हम जैन हैंÓ विषय पर कहा कि अपेक्षा एक बीमारी है। इस बीमारी से लगभग सभी ग्रस्त हैं। उन्होंने कहा कि बाप अपने बेटों से अपेक्षाएं रखता है कि वह अपनी सुनें और भविष्य में सेवा करें। सास अपनी बहू से अपेक्षा रखती है कि वह उसकी सेवा करेगी।
नेता अपेक्षा करते हैं कि उसका समर्थक कहे अनुसार काम करेगा। लेकिन जब ये अपेक्षाएं पूर्ति न होती हैं तो सभी को दुख होता है और क्लेश, झगड़े, नफरत आदि पनपने लगते हैं। इसीलिए अच्छा यह होगा कि हम अपेक्षा ही कम रखें। यदि अपनी अपेक्षाओं से भी बढ़कर यदि हमें किसी का सहयोग या सेवा प्राप्त होती है तो हमें आनंद ही आएगा।
प्रारम्भ में जयवंत मुनि ने संयम की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए गीतिका प्रस्तुत की। जयवंत मुनि ने कहा कि मनुष्य जन्म में समय भी है और समझ भी, परन्तु तिर्यंच पशु-पक्षियों के पास समय तो बहुत है, पर समझ नहीं। भवांत मुनि ने तपस्वियों के प्रति मंगलकामना अर्पित की। सभा में पेरम्बूर, चेन्नई से दर्शनार्थी उपस्थित रहे। रविवार को आचार्य आनंद ऋषि की जयंती तप व त्याग के साथ मनाई जाएगी।
तप से होता है पापों का नाश
बेंगलूरु. श्रीरामपुरम जैन स्थानक में साध्वी दिव्य ज्योति ने कहा कि मुक्ति महल का तीसरा दरवाजा तप है। हमारे आगमों में तप की बड़ी भारी महिमा बताई गई है। तप दो प्रकार से आंतरिक और ब्राह्य रूप से किया जाता है। मनुस्मृति में तप का महत्व बताते हुए उन्होंने कहा कि तप से पापों का नाश हो जाता है। जिस प्रकार अग्नि स्वर्ण को तपाकर मिट्टी एवं कचरा साफ कर कांतियुक्त चमकीला बना देती है, उसी प्रकार तप की अग्नि में तपाकर आत्मा को पवित्र और उज्ज्वल बनाया जाता है। साध्वी अमित सुधा ने कहा कि हम महान पुण्यशाली हंै, अनंत पुण्यों का संचय साथ में लेकर आए जिसके कारण हम भाग्यशाली बन गए। उसी भाग्य से हम आगे बढ़ते-बढ़ते जैन कुल में आकर वीर का शासन पाया।