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उसी का जन्म सफल जिसने अपने जीवन में कुछ धर्म कमाया

विजयनगर में साध्वी मणि प्रभा ने कहा कि जो वाणी बोली जाती है वह अपनी विचारधारा को प्रकट करने के लिए होती है
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उसी का जन्म सफल जिसने अपने जीवन में कुछ धर्म कमाया

बेंगलूरु. विजयनगर में साध्वी मणि प्रभा ने कहा कि जो वाणी बोली जाती है वह अपनी विचारधारा को प्रकट करने के लिए होती है। उन्होंने कहा कि किसी इंसान की वाणी ऐसी होती है कि वह शत्रु को भी मित्र बना लेती है और किसी व्यक्ति की वाणी मित्र को, अपनों को पराया बना देती है। इसलिए वाणी का विवेक रखना आवश्यक है। साध्वी ऋजुता ने कहा कि मौत संसार का एक ऐसा सत्य है जो कभी बदल नहीं सकता है।

यह एक ऐसा शब्द है कि व्यक्ति को पता चल जाए कि अब उसकी मौत होने वाली है तो वह अंदर तक कांप जाता है। डर जाता है, परंतु जिसका जन्म होता है उसका मरण भी अवश्य होता है। यह संसार का शाश्वत सत्य है। जन्म उसी का सफल है, जिसने इस संसार में आकर इस मानव तन को पाकर इसका कुछ लाभ उठाया। कुछ धर्म कमाया। इस मानव से जो समय सार्थक किया।

धर्म ध्यान में बिताया वही समय सार्थक है। बाकी समय निरर्थक है। कन्या मंडल की ओर से अंत्याक्षरी का आयोजन किया गया, जिसमें मंजू पोरवाल टीम प्रथम, मंजू रांका, सीमा रांका, लीला कटारिया, पूजा कोठारी टीम द्वितीय, कंचन गुगलिया, प्रेमा बाफना, सुमित्रा वया, शिखा आंचलिया की टीम ने तृतीय पुरस्कार प्राप्त किया। बड़ी संख्या में श्रावकों ने हिस्सा लिया।


सुमतिनाथ भगवान का स्मरण मंगलदायी
बेंगलूरु. वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ सिद्धार्थ नगर सीआइटीबी चोल्ट्री में श्रुत मुनि ने 'वैभव पाओ श्रीवत्स सेÓ का विश्लेषण करते हुए कहा कि आठवां एवं आखिरी मंगल 'श्रीवत्सÓ ईशान कोण में स्थापित करना चाहिए। यह स्थान ऊंचा हो, देवरूपी, शुद्धता का द्योतक हो। इसे महाविदेह यंत्र की संज्ञा दी गई है, जहां विहरमान है। उन्होंने कहा कि पंच महाव्रतधारी, पुण्यशाली, महापुरुषों का वास होता है। इस दिशा में सुमतिनाथ भगवान का स्मरण करना शुभ मंगलदायी होता है। गुरु गृह का प्रभाव होता है।

इस कोण में गुरु की साधना करना भी शुभ फलदायी है। इस कोण में सोना, भोजन करना तथा नहाने का स्थान कदापि नहीं होना चाहिए। मुनि ने कहा कि श्रीवत्स की आराधना करने से जीवन में क्रूरता, भय, डर, बाधा, लक्ष्मी दायक है। शास्त्रों में लक्ष्मी के चार प्रकार का उल्लेख आता है। पहला ज्ञानलक्ष्मी, दूसरा सौभाग्यलक्ष्मी तीसरा धनलक्ष्मी, चौथा गृहलक्ष्मी
बताया गया है। सभा में ललित पोखरना एवं संतोष बाई भटेवरा ने तपस्या के प्रत्याख्यान ग्रहण किए। संघ अध्यक्ष सम्पत कोठारी ने केंद्र सरकार द्वारा अल्पसंख्यक कोटे में दिए जाने वाले ऋण सुविधा की जानकारी दी।

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