
धर्म श्रवण से बढ़ता है आत्म तत्त्व का बोध
मैसूरु. सुमतिनाथ जैन संघ के महावीर भवन में आचार्य विजय रत्नसेन सूरीश्वर ने कहा कि आत्म विकास के लिए धर्म श्रवण की उतनी ही आवश्यकता है, जितनी देह धारण के लिए अन्न जल की। उन्होंने कहा कि अन्न पान से शरीर पुष्ट होता है, उसी प्रकार धर्म श्रवण से आत्मा का आरोग्य बढ़ता है। निरंतर धर्म श्रवण से आत्म तत्त्व का बोध होता है। अपनी आत्मा के मलिन स्वरूप का ज्ञान होता है और ज्ञान के बाद ही आत्मशुद्धि के लिए प्रयत्न किया जा सकता है। बुधवार को आचार्य रामचंद्र सूरीश्वर की पुण्यतिथि निमित्त त्रिदिवसीय देव गुरु भक्ति कार्यक्रम आरंभ होंगे।
परिग्रह सबसे बड़ा पाप
बेंगलूरु. चामराजपेट में साध्वी वीना ने कहा कि सभी तपों में ब्रह्मचर्य सबसे श्रेष्ठ है। शील ही श्रेष्ठ आभूषण है। शील ही रक्षा कवच है।
उन्होंने कहा कि जैन धर्म और बौद्ध धर्म में शील का बहुत महत्त्व है। इसलिए हमें शील का पालना करना चाहिए ताकि आत्मा का कल्याण हो सके। साध्वी अर्पिता ने कहा कि 18 पापों में से 5वें पाप की चर्चा चल रही है। जो व्यक्ति सामान के चारों ओर चक्र लगाते हैं वह नरक में ही जाते हैं। सभी पापों में सबसे बड़ा पाप परिग्रह है। हमारी इच्छाएं आकाश की तरह अनंत हैं। साध्वी वीरकांता ने मांंगलिक दी। आचार्य आनंद ऋषि की जयंती 12 अगस्त को मनाई जाएगी।
गर्ग अध्यक्ष, सर्राफ सचिव
बेंगलूरु. अग्रवाल समाज कर्नाटक के अग्रसेन भवन में कार्यकारिणी चुनाव हुए। जिसमें संजय गर्ग अध्यक्ष, विजय सर्राफ सचिव, महावीर प्रसाद अग्रवाल, राजकमल गनेरीवाल उपाध्यक्ष, दिनेश झुरिया कोषाध्यक्ष, सतीश गोयल संयुक्त सचिव, संजय अग्रवाल सहायक सचिव, सुभाष बंसल तत्काल भूतपूर्व अध्यक्ष, ऋषि गुप्ता संयोजक फंड रेजिंग, महेश अग्रवाल संयोजक दक्षिण क्षेत्र, शिव कुमार टेकरीवाल संयोजक पश्चिम क्षेत्र, अनिल सिंघल संयोजक पूर्वी क्षेत्र, रामाकांत सर्राफ संयोजक उत्तरी क्षेत्र, दिनेश तुलसयान संयोजक सांस्कृतिक गतिविधि चुने गए। वहीं सुनील शाह संयोजक सामाजिक गतिविधि, सुनील जैन संयोजक सदस्यता, कैलाश मित्तल संयोजक मैरिज ब्यूरो, अनिल अलम्पुरिया संयोजक आयोजन, नरेश गुप्ता संयोजक महिला, यतीश जैन संयोजक युवा नियुक्त हुए।
Published on:
08 Aug 2018 05:02 pm
