
बेंगलूरु. राज्य सरकार ने जनवरी में कृषि उपज बाजार समितियों के माध्यम से बेंगलूरु ग्रामीण, मंड्या, बीदर, हासन, दावणगेरे, कलबुर्गी जिलों में न्यूनतम खरीदी मूल्य पर बड़े पैमाने पर रागी, धान तथा तुअर खरीदी है। लेकिन किसान इस राशि को प्राप्त करने के लिए समितियों के चक्कर लगाने पर मजबूर हंै। तीन माह से किसानों को 1450 करोड़ रुपए की बकाया राशि का भुगतान नहीं किया गया है।
राज्य किसान संघ के सचिव नारायण रेड्डी के मुताबिक नई फसल के लिए किसानों को बीज तथा उर्वरक खरीदने के लिए पैसों की आवश्यकता है लेकिन कृषि उपज मंडियां इस बकाया राशि के भुगतान में देर कर रही हैं। जबकि एक सप्ताह में भुगतान का वादा किया गया था। दावणगेरे जिले में 67 हजार क्विंटल धान खरीदा गया। लेकिन इसकी बकाया राशि का भुगतान नहीं हो रहा है।
उधर खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री उमेश कत्ती का कहना है कि इस बार जिलों में बड़े पैमाने पर धान, रागी तथा तुअर खरीदी गई है। किसानों को चिंतित होने की आवश्यकता नहीं है। तकनीकी समस्याओं को लेकर वित्त विभाग से बातचीत की जा रही है। अगले सप्ताह भुगतान किया जाएगा। राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में जमा होगी।
उल्लेखनीय है कि राज्य में जनवरी में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर 386.42 करोड़ रुपए का 20 लाख टन धान, 114.77 करोड़ रुपए की 43 हजार टन जवार और 1455.34 करोड़ रुपए की 4 लाख 35 हजार 869 टन रागी खरीदी गई है