बैंगलोर

चोरी का सोना गिरवी रखने से निपटने के दिशा-निर्देश बनाएं, हाई कोर्ट का कर्नाटक विधि आयोग से अनुरोध

इस न्यायालय के समक्ष ऐसे असंख्य मामले आ रहे हैं, जिनमें चोरी के सोने को स्वर्ण वित्त कंपनी के पास गिरवी रखा गया है।उन्होंने कहा, मेरा विचार है कि संबंधित प्राधिकारियों द्वारा इस पहलू की जांच की जानी चाहिए और सोना गिरवी रखने, स्वामित्व का पता लगाने, सोना गिरवी रखने वाले व्यक्ति की पहचान, चोरी के सोना गिरवी रखने के निहितार्थ, आपराधिक कार्यवाही शुरू होने पर इससे निपटने के तरीके आदि के संबंध में उचित दिशा-निर्देश तैयार किए जाने चाहिए।

2 min read

बेंगलूरु. कर्नाटक उच्च न्यायालय ने विधि आयोग से अनुरोध किया है कि वह स्वर्ण वित्त कंपनियों के पास चोरी का सोना गिरवी रखने, इसके निहितार्थ और आपराधिक कार्यवाही शुरू होने पर इससे निपटने की प्रक्रिया के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश और नियम बनाए।

न्यायाधीश सूरज गोविंदराज ने कहा कि इस न्यायालय के समक्ष ऐसे असंख्य मामले आ रहे हैं, जिनमें चोरी के सोने को स्वर्ण वित्त कंपनी के पास गिरवी रखा गया है।उन्होंने कहा, मेरा विचार है कि संबंधित प्राधिकारियों द्वारा इस पहलू की जांच की जानी चाहिए और सोना गिरवी रखने, स्वामित्व का पता लगाने, सोना गिरवी रखने वाले व्यक्ति की पहचान, चोरी के सोना गिरवी रखने के निहितार्थ, आपराधिक कार्यवाही शुरू होने पर इससे निपटने के तरीके आदि के संबंध में उचित दिशा-निर्देश तैयार किए जाने चाहिए।

उन्होंने कहा कि इसलिए, मैं विधि आयोग कर्नाटक से अनुरोध करता हूं कि वह इस मामले पर गौर करे और उचित समझे जाने पर आवश्यक दिशा-निर्देश/नियम या इसी तरह के अन्य नियम बनाए।

अदालत ने यह बात मुथूट फाइनेंस लिमिटेड द्वारा दायर याचिका का निपटारा करते हुए कही। मुथूट फाइनेंस लिमिटेड ने बेगूर पुलिस स्टेशन द्वारा जारी किए गए नोटिस पर सवाल उठाते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया था। इसमें कंपनी के पास मौजूद कुछ सोने के सामान उपलब्ध कराने को कहा गया था। नोटिस में कहा गया कि ये चोरी हो गए हैं और याचिकाकर्ता के पास गिरवी रखे गए हैं।

कंपनी ने तर्क दिया कि वह जांच में सहयोग करेगी, लेकिन याचिकाकर्ता के पास गिरवी रखा गया सोना उसे अपने पास रखना होगा क्योंकि याचिकाकर्ता के पास गिरवीदार होने के नाते उस पर अधिकार है। रिकॉर्ड देखने के बाद पीठ ने कहा, याचिकाकर्ता के पास केवल गिरवीदार होने के नाते उक्त सोने पर केवल उतना ही अधिकार है, जितना गिरवीदार का है। याचिकाकर्ता इससे अधिक किसी अधिकार का दावा नहीं कर सकता।

कोर्ट ने कहा कि जांच के दौरान, जांच अधिकारी को संबंधित सोने के स्वामित्व सहित विभिन्न पहलुओं का पता लगाना होगा और यदि पूर्व दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 454 (अब बीएनएसएस की धारा 500) के तहत आवेदन दायर किया जाता है, तो यह तय करना मामले की सुनवाई कर रही अदालत का काम है कि सोना किसके पक्ष में लौटाया जाए।

अदालत ने कहा, सोने के असली मालिक को केवल इसलिए सोने के उपयोग से वंचित नहीं किया जा सकता क्योंकि वह ऐसे असली मालिक से चुराए जाने के बाद सोने को एक गोल्ड फाइनेंस कंपनी के पास गिरवी रख दिया गया है। गोल्ड फाइनेंस कंपनी का यह कर्तव्य है कि वह ऋण वितरित करने के लिए सोने को गिरवी रखने से पहले उचित जांच-पड़ताल करे।

तदनुसार, इसने याचिकाकर्ता को जांच अधिकारी के साथ सहयोग करने और गिरवी से संबंधित सभी विवरण उपलब्ध कराने तथा सोने के निरीक्षण की अनुमति देने का निर्देश दिया, जिसकी आवश्यकता होने पर जांच अधिकारी रसीद ले सकता है और मामले की सुनवाई कर रही अदालत में जमा कर सकता है।

अदालत ने कहा कि इस निष्कर्ष पर पहुंचने पर कि उक्त सोना चोरी हो गया है, यह स्पष्ट किया जाता है कि पुलिस अधिकारी सोने को अपने कब्जे में नहीं रख सकता बल्कि उसे मामले को देखने वाली अदालत के पास जमा करना होगा।

अदालत ने सोना छोडऩे के लिए किसी भी आवेदन पर विचार करते समय मामले को अपने कब्जे में लिया या उस समय जब अदालत किसी भी कारण से देने का आदेश पारित करती है, तो उसे याचिकाकर्ता को नोटिस जारी करना होगा और सोना देने का आदेश देने से पहले याचिकाकर्ता को सुनवाई का अवसर देना होगा।

Published on:
07 Jan 2025 11:03 pm
Also Read
View All

अगली खबर