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पूर्व मंत्री बैरती बसवराज को नहीें मिली अग्रिम जमानत

कर्नाटक हाई कोर्ट Karnataka High Court ने समाजकंटक और रीयल एस्टेट कारोबारी शिवप्रकाश उर्फ बिकलू शिवा की हत्या से जुडे मामले में भाजपा विधायक और पूर्व मंत्री बी.ए. बसवराज B.A. Basavaraj की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत के इस आदेश के साथ ही 26 दिसंबर को दी गई अंतरिम अग्रिम जमानत भी स्वतः […]

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कर्नाटक हाई कोर्ट

न्यायाधीश एस. सुनील दत्त यादव ने मंगलवार को विधायक की याचिका पर सुनवाई करते हुए फैसला सुनाया।

कर्नाटक हाई कोर्ट Karnataka High Court ने समाजकंटक और रीयल एस्टेट कारोबारी शिवप्रकाश उर्फ बिकलू शिवा की हत्या से जुडे मामले में भाजपा विधायक और पूर्व मंत्री बी.ए. बसवराज B.A. Basavaraj की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत के इस आदेश के साथ ही 26 दिसंबर को दी गई अंतरिम अग्रिम जमानत भी स्वतः समाप्त हो गई।

न्यायाधीश एस. सुनील दत्त यादव ने मंगलवार को विधायक की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया। अदालत ने मामले की गंभीरता और जांच की स्थिति को देखते हुए अग्रिम राहत देने से इनकार कर दिया।

संपत्ति विवाद

पिछले साल जुलाई में भारती नगर में आरोपियों ने बिकलू शिवकुमार की हत्या कर दी थी। जांच के दौरान पचा चला कि यह हत्या पहले हुए संपत्ति विवाद की वजह से की गई थी। इस मामले में विधायक बसवराज को प्राथमिकी में आरोपी नंबर पांच के रूप में नामजद किया गया है। प्रारंभ में उन पर हत्या और साजिश रचने के आरोप लगाए गए थे। इसके खिलाफ उन्होंने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर प्राथमिकी को चुनौती दी थी। अगस्त में अदालत ने उन्हें अंतरिम संरक्षण देते हुए पुलिस को उनके खिलाफ कोई जबरन कार्रवाई न करने का निर्देश दिया था।

बाद में जांच बेंगलूरु पुलिस से लेकर अपराध अनुसंधान विभाग (सीआइडी) को सौंप दी गई। प्राथमिकी को चुनौती देने वाली याचिका लंबित रहने के दौरान सीआइडी ने विधायक समेत सभी आरोपियों पर कर्नाटक संगठित अपराध नियंत्रण कानून (केसीओसीए)-2000 के प्रावधान लागू कर दिए। इसके बाद विधायक ने केसीओसीए लगाने को भी हाई कोर्ट में चुनौती दी।

केसीओसीए रद्द, लेकिन राहत नहीं

19 दिसंबर को हाई कोर्ट ने विधायक और अन्य आरोपियों पर केसीओसीए लगाए जाने को रद्द कर दिया। इसके बाद बसवराज ने प्राथमिकी को चुनौती देने वाली अपनी याचिका वापस लेते हुए अग्रिम जमानत की मांग की। हाई कोर्ट ने उन्हें सत्र अदालत जाने का निर्देश दिया।

23 दिसंबर को मौजूदा और पूर्व सांसदों व विधायकों के मामलों के लिए गठित विशेष सत्र अदालत ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि विधायक और एक अन्य आरोपी के खिलाफ जांच अभी पूरी नहीं हुई है, जबकि सीआइडी बाकी 18 आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है। इसके बाद विधायक ने फिर हाई कोर्ट का रुख किया। अवकाशकालीन पीठ ने 26 दिसंबर को उन्हें अंतिम निर्णय तक अंतरिम अग्रिम जमानत दी थी।