मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि आज के आधुनिक और एआइ युग में मोबाइल फोन को पूरी तरह खत्म करना संभव नहीं है, इसलिए संतुलित और व्यावहारिक नियम बनाए जाएंगे।
कर्नाटक सरकार 16 वर्ष से कम उम्र के छात्रों के मोबाइल फोन और सोशल मीडिया Mobile Phone and Social Media उपयोग को नियंत्रित करने के लिए एक व्यापक नीति लाने जा रही है।
स्कूल शिक्षा और साक्षरता मंत्री मधु बंगारप्पा ने सोमवार को विधान परिषद में यह घोषणा की। वे प्रश्नकाल के दौरान विधान सभा सदस्य प्रताप नायक और जावरे गौड़ा के सवालों का जवाब दे रहे थे। मंत्री ने माना कि बच्चों पर सोशल मीडिया के बढ़ते दुष्प्रभाव को लेकर गंभीर चिंताएं सामने आ रही हैं। मंत्री ने कहा कि बच्चों में मोबाइल की लत चिंताजनक स्तर तक पहुंच गई है, इसलिए कड़े कदम उठाना जरूरी हो गया है।
मंत्री ने बताया कि फिलहाल स्कूलों में मोबाइल फोन के उपयोग पर रोक के नियम तो हैं, लेकिन उनका सही तरीके से पालन नहीं हो रहा है। कई छात्र स्कूल के बाहर मोबाइल का इस्तेमाल करते हैं और इस पर कोई प्रभावी निगरानी नहीं है।उन्होंने कहा कि सरकार ने बजट में पहली बार यह प्रस्ताव रखा है कि 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए मोबाइल उपयोग पर प्रतिबंध लगाया जाए। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आज के आधुनिक और एआइ युग में मोबाइल फोन को पूरी तरह खत्म करना संभव नहीं है, इसलिए संतुलित और व्यावहारिक नियम बनाए जाएंगे।
मधु बंगारप्पा ने कहा कि मोबाइल फोन शिक्षा में सहायक हो सकते हैं, लेकिन आजकल बच्चों तक अनावश्यक और हानिकारक सामग्री अधिक पहुंच रही है, जो उनके विकास पर असर डाल रही है।सरकार इस दिशा में आइटी विभाग के साथ मिलकर काम कर रही है, जिसने सोशल मीडिया के उपयोग की जांच के लिए एक समिति गठित की है। इसके अलावा, स्कूलों में नैतिक शिक्षा को फिर से शुरू किया गया है। इस वर्ष से सभी छात्रों को मुफ्त में ‘मोरल साइंस’ की किताबें दी जा रही हैं और इसके लिए अलग से पीरियड तय किए गए हैं।
मंत्री ने कहा कि इस नीति को अंतिम रूप देने से पहले अभिभावकों, विशेषज्ञों और अंतरराष्ट्रीय बाल संगठनों से भी सुझाव लिए जाएंगे। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि यह बच्चों के भविष्य से जुड़ा मुद्दा है और सोशल मीडिया का दुरुपयोग देश में एक बड़ी समस्या बन चुका है।उन्होंने यह भी माना कि केवल प्रतिबंध लगाने से समस्या पूरी तरह हल नहीं होगी, क्योंकि बच्चे छिपकर भी मोबाइल का उपयोग कर सकते हैं। इसलिए सरकार एक ऐसा मॉडल तैयार करना चाहती है, जो प्रभावी और अनुकरणीय हो।
मंत्री ने कहा, यह भारत में पहली बार हो रहा है। हम चाहते हैं कि यह नीति दूसरे राज्यों के लिए भी एक उदाहरण बने।