
बेंगलूरु. बॉलीवुड की अभिनेत्री उर्मिला मातोंडकर ने कहा कि महिलाएं कर्मयोगी होती हैं, वे यशस्विनी हैं। एक्सपोजर, एक्सपीरियंस और इंटरटेंनमेंट की त्रिवेणी के आधार पर आज हर क्षेत्र में वे अपना लोह मनवा चुकी हैं। अपने संस्कार, विचार और व्यवहार से परिवार, समाज और देश को प्रगति के पथ पर आगे बढ़ा रही हैं। जैन इंटरनेशनल ट्रेड आर्गेनाइजेशन (जीतो) की ओर से पैलेस ग्राउंड में आयोजित जीतो ग्रोथ समिट के दूसरे दिन शनिवार को लेडीज विंग कॉन्फ्रेंस में बतौर मुख्य अतिथि बोलती हुई उन्होंने कहा कि नारी शक्ति के बारे में आज बताने की जरूरत नहीं हैं। जीतो लेडीज विंग के इस आयोजन ने यह प्रमाणित कर दिया कि जिस समाज में इतनी बड़ी संख्या में महिलाएं जागरूक हों, एकजुट हों- वह समाज औरों के जिए अनुकरणीय है। अपना उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि अगर एक लड़की निर्भीक, निडर होकर अपना अधिकार पाने का निश्चय कर ले तो उसे आगे बढऩे से कोई नहीं रोक सकता। दिमाग, अपना होता है, चाहत अपनी होती है और इसी के सहारे जिंदगी में कहीं भी, किसी भी मुकाब पर पहुंचा जा सकता है। अभिनेत्री ने जोर देकर कहा कि आज समय महिलाओं का है। बेटियों-बहुओं को पीछे मत रखिए, उन्हें कमतर मत आंकिए। एक दिन यही आपका नाम रौशन करेंगी।
अति महान हैं घरेलू महिलाएं
उर्मिला ने कहा कि जो महिलाएं कार्पाेरेट जगत में हैं वह तो महान हैं ही, लेकिन जो महिलाएं घर-गृहस्थी संभालती हैं वे अति महान हैं। इन सबका ऋण समाज कभी भी नहीं चुका सकता। ऐसी महिलाओं को कभी मेडल नहीं मिलता। अगर ये महिलाएं सक्रिय नहीं रहें तो जीवन की गाड़ी रुक जाएगी। उन्होंने कहा कि महिलाओं की ही जिम्मेवारी है कि वे ऐसी महिलाओं को आगे बढ़ाने में मदद करें। ऐसा करके महिला सशक्तीकरण को बढ़ावा मिलेगा। जीतो के प्रोजेक्ट उड़ान की चर्चा करते हुए कहा कि इससे महिलाओं की ही नहीं बल्कि पूरे परिवार और समाज का आर्थिक सुदृढ़ीकरण होगा और महिलाएं आत्मनिर्भर बन सकेंगी। अभिनेत्री ने अपनी चर्चित फिल्म का गाना- लच मेरे संग-संग, ले ले दुनिया के रंग...रंगीला ले... सुनाकर महिलाओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। इससे पूर्व जब वह मंच पर आईं तो जीतो की अति उत्साहित महिलाओं ने सीटियां बजाकर उनका अभिवादन किया।
दूसरों से अपने बच्चों की तुलना न करें
लेडीज कॉन्फ्रेंस की मुख्य वक्ता डॉ. स्वाति लोढ़ा ने पैरेंटिंग पर प्रजेंटेशन देते हुए कहा कि माता-पिता को जैसा करते हुए बच्चे देखते हैं वे भी वैसा ही व्यवहार करते हैं। इसलिए बच्चों से आप जैसी अपेक्षा रखते हैं आप पहले वैसा ही करके दिखाइए। बच्चे आपका कहना मानेंगे। उन्होंने कहा कि आज ऐसा नहीं होता। अभिभावक दूसरे बच्चों के साथ अपने बच्चे की तुलना करते हैं। तुम भी उसी के जैसा बनो। उतने ही माक्र्स ले आओ। इतना ही नहीं, यह भी कहा जाता है कि मैं तो तुम्हारी उम्र का था तो यह कर दिया, वह कर दिया। यह नहीं बताया जाता कि उस उम्र में आपने कितने माक्र्स लाए, आप कितनी बार फेल हुए। आपकी कमजोरियां क्या थीं? उन्होंने कहा कि दूसरे बच्चों से तुलना करना छोडिय़े। यह बच्चों के साथ ऑनेस्ट कम्युनिकेशन नहीं है। बच्चे जानते हैं कि आप क्या हैं। इसलिए दूसरे बच्चों से अपने बच्चे की तुलना करना बंद कर दीजिए-जिंदगी आसान हो जाएगी। बच्चों को समझाने का हमारा तरीका गलत है। उन्होंने कहा कि अभिभावक बेटा-बेटी में फर्क करते हैं। सिर्फ बेटियों को ही नहीं, बेटों को भी उसकी जिम्मेवारी, अनुशासन और व्यावहारिकता सिखाइए।
बच्चों से सौदेबाजी ठीक नहीं
डॉ. लोढ़ा ने कहा कि बच्चों से सौदेबाजी ठीक नहीं। पहले अच्छे नंबर लाकर दिखाओ फिर बाइक मिलेगी। अच्छे नंबर लाओ तो विदेश भ्रमण पर भेजेंगे। यह सौदेबाजी नहीं तो और क्या है? इससे न बच्चे का भला होगा न आपका। बच्चों की जिंदगी बेहतर करने के लिए आपको त्याग करना होगा। बच्चों के सामने वैसा ही व्यवहार करना होगा जिसकी उम्मीद आप खुद उनसे करते हैं। बच्चों का भविष्य बनाने के लिए ऐसा करना नितांत आवश्यक है। जीतो लेडीज विंग की ओर से स्मृति चिह्न देकर दोनों वक्ताओं को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर जीतो बेंगलूरु चैप्टर के अध्यक्ष पारस भंडारी ने भी विचार व्यक्त किए।