Karnataka BJP: कर्नाटक भाजपा में नए प्रदेश अध्यक्ष को लेकर जल्द फैसला हो सकता है। पार्टी प्रभारी राधा मोहन दास अग्रवाल ने संकेत दिए हैं कि नेतृत्व परिवर्तन पर चर्चा जारी है। बी.वाई. विजयेंद्र के दोबारा अध्यक्ष बनने या नए चेहरे को मौका मिलने पर अंतिम निर्णय पार्टी आलाकमान करेगा।
Karnataka BJP: कर्नाटक में प्रदेश भाजपा के नए प्रमुख को लेकर पार्टी आलाकमान जल्द फैसला ले सकता है। मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र का तीन साल का कार्यकाल इस वर्ष नवंबर में समाप्त हो रहा है। पार्टी के प्रदेश प्रभारी और राष्ट्रीय महासचिव राधा मोहन दास अग्रवाल ने गुरुवार को संकेत दिया कि पार्टी जल्द ही प्रदेश अध्यक्ष को लेकर घोषणा कर सकती है। बेंगलूरु में पार्टी नेताओं की बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए अग्रवाल ने कहा, फिलहाल एक प्रदेश अध्यक्ष हैं और वह सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। यह मान लेना गलत है कि राष्ट्रीय नेता यहां उनके कामकाज का मूल्यांकन करने आए हैं। भाजपा में मूल्यांकन एक निरंतर प्रक्रिया है और राष्ट्रीय नेतृत्व सभी घटनाक्रमों से अवगत है। उन्होंने कहा, धीरे-धीरे हम एक बार फिर अध्यक्ष की घोषणा की ओर बढ़ रहे हैं।
बैठक में भाजपा के राष्ट्रीय संयुक्त महासचिव (संगठन) शिवप्रकाश, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बैजयंत जय पांडा, विजयेंद्र, विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक और विधान परिषद में विपक्ष के नेता सी. नारायणस्वामी सहित कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। विजयेंद्र को दोबारा अध्यक्ष बनाए जाने के सवाल पर अग्रवाल ने सीधा जवाब देने से बचते हुए कहा कि भाजपा में प्रदेश अध्यक्ष का पद तीन साल के तय कार्यकाल वाला नहीं होता। उन्होंने कहा कि पार्टी का सिद्धांत है कि किसी अध्यक्ष को अधिकतम दो कार्यकाल दिए जा सकते हैं। अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व करेगा।
अग्रवाल ने कहा, मौजूदा अध्यक्ष पूर्ण अधिकार प्राप्त हैं। घोषणा के बाद चाहे वही अध्यक्ष रहें या कोई नया चेहरा आए, पार्टी अध्यक्ष की शक्ति कम नहीं होगी। उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव भी पार्टी ने विजयेंद्र के नेतृत्व में ही लड़ा था। वरिष्ठ नेता बी.एस. येडियूरप्पा के पुत्र विजयेंद्र को नवंबर 2023 में प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था। पहली बार विधायक बने विजयेंद्र की नियुक्ति के बाद से ही पार्टी के भीतर एक गुट असंतुष्ट रहा है और नेतृत्व परिवर्तन की मांग उठती रही है।
अग्रवाल ने राज्य की कांग्रेस सरकार को भ्रष्ट, कमजोर और तुष्टीकरण की राजनीति पर आधारित सरकार करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के भीतर पिछले छह-सात महीनों से सत्ता संघर्ष चल रहा है, जिससे प्रशासनिक कामकाज प्रभावित हुआ है। उन्होंने कहा, कांग्रेस सरकार जनता से किए गए अपने वादे और गारंटी योजनाएं भी सही तरीके से लागू नहीं कर पाई है। कर्ज और आर्थिक कुप्रबंधन के कारण राज्य गंभीर वित्तीय संकट से गुजर रहा है। उन्होंने कहा, जनता ने 2028 के विधानसभा चुनावों को लेकर अभी से मन बना लिया है। लोग कांग्रेस से छुटकारा चाहते हैं और भाजपा की सरकार लाने के लिए तैयार हैं।
कांग्रेस के अंदर मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रही खींचतान पर टिप्पणी करते हुए अग्रवाल ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि खरगे दिल्ली में बैठकर मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या और उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के बीच लड़ाई करवाने में लगे हैं। उन्होंने कहा, राज्य मुख्यमंत्री पद के लिए सिर्फ दो चेहरे नहीं हैं, असली चेहरा तो दिल्ली में बैठा है। पूर्व प्रधानमंत्री और जद-एस नेता एच.डी. देवगौड़ा को दोबारा राज्यसभा भेजे जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि यह गठबंधन से जुड़ा विषय है और इसका फैसला राष्ट्रीय नेतृत्व करेगा।
शिवप्रकाश ने गुरुवार को नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर वरिष्ठ नेताओं, सांसदों, विधायकों, विधान पार्षदों और प्रदेश पदाधिकारियों से चर्चा की और उनकी राय सुनी। प्रदेश कार्यालय में पूर्व मुख्यमंत्री डी. वी. सदानंद गौड़ा, पूर्व मुख्यमंत्री सी. एन. अश्वथनारायण, सांसद पी. सी. मोहन, लहर सिंह सिरोया सहित नेताओं से अलग-अलग बातचीत की। शिवप्रकाश बाद में प्रदेश कोर समिति की बैठक में भी शामिल हुए। पार्टी सूत्रों के बाद शुक्रवार को नई दिल्ली लौटने के बाद शिवप्रकाश पार्टी नेतृत्व को नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति के बारे में नेताओं की राय पर पार्टी अध्यक्ष नबीन को रिपोर्ट देंगे। इसके बाद नबीन राज्य के केंद्रीय मंत्रियों और अन्य वरिष्ठ नेता से मंत्रणा कर निर्णय लेंगे।