
Karnataka Politics: कर्नाटक कांग्रेस में कैबिनेट विस्तार के बाद शुरू हुई नाराजगी अब बेंगलुरु से निकलकर जमीन पर दिखाई देने लगी है। मंत्री पद की उम्मीद लगाए बैठे विधायकों को जगह नहीं मिलने से पार्टी के अंदर असंतोष है। इसी बीच चिक्कबल्लापुर जिले के बागेपल्ली से ऐसा विरोध सामने आया है, जिसने कांग्रेस नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है। विधायक एसएन सुब्बारेड्डी को मंत्री नहीं बनाए जाने के विरोध में बागेपल्ली, गुडिबांडे और चेलूर में बंद का असर देखने को मिल रहा है।
दरअसल, कर्नाटक में सोमवार को कैबिनेट विस्तार हुआ। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की सरकार में 20 नए विधायकों को मंत्री पद की शपथ दिलाई गई। इसके साथ ही मंत्रिमंडल अपनी अधिकतम संख्या 34 तक पहुंच गया। यानी अब जिन विधायकों को मंत्री बनने की उम्मीद थी, उनके लिए आगे मौके सीमित हो गए हैं। यही वजह है कि कैबिनेट विस्तार के तुरंत बाद कांग्रेस के भीतर नाराजगी खुलकर सामने आने लगी।
बेंगलुरु में कुछ नाराज विधायकों की तरफ से असंतोष और इस्तीफे तक की चर्चा सामने आई। मामले पर डीके शिवकुमार ने भी साफ और सख्त संदेश दिया। उन्होंने कहा कि अगर कोई विधायक इस्तीफा देना चाहता है तो उनका इस्तीफा कुछ ही मिनटों में स्वीकार किया जा सकता है। इस बयान से साफ है कि पार्टी नेतृत्व फिलहाल दबाव की राजनीति के आगे झुकने के मूड में नहीं है।
इसी बीच बागेपल्ली विधायक एसएन सुब्बारेड्डी के समर्थकों ने विरोध का रास्ता चुना। समर्थकों की नाराजगी की वजह यह है कि लगातार विधायक रहने के बावजूद सुब्बारेड्डी को मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली। उनके समर्थन में कार्यकर्ता और स्थानीय नेता लामबंद हुए और इसके बाद तीन इलाकों में बंद का आह्वान किया गया।
बुधवार को बागेपल्ली, गुडिबांडे और चेलूर में कई दुकानें बंद रहीं। कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बसों को रोकने और परिवहन व्यवस्था प्रभावित करने की खबरें भी सामने आई हैं। इससे आम लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा।
कर्नाटक कांग्रेस के लिए यह मामला इसलिए भी अहम है, क्योंकि कैबिनेट विस्तार का मकसद सरकार और पार्टी के भीतर संतुलन बनाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा था। लेकिन विस्तार के बाद ही कुछ इलाकों में विरोध शुरू होना बताता है कि मंत्री पद की दौड़ अभी पूरी तरह शांत नहीं हुई है।
अब नजर इस बात पर है कि कांग्रेस नेतृत्व सुब्बारेड्डी के समर्थकों की नाराजगी कैसे शांत करता है और बेंगलुरु में उठे असंतोष को जिलों तक फैलने से कैसे रोकता है। आने वाले दिनों में कर्नाटक कांग्रेस के लिए यह एक बड़ी राजनीतिक चुनौती बन सकती है।