बैंगलोर

कर्नाटक में टीबी नियंत्रण के लिए व्यापक योजना लागू

मंत्री ने कहा कि बुखार, लगातार खांसी, रात में पसीना, बलगम में खून और थकान जैसे लक्षण होने पर तुरंत चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए। सरकारी अस्पतालों में टीबी की जांच और इलाज पूरी तरह मुफ्त उपलब्ध है।
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Mar 24, 2026
टीबी
file photo

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री दिनेश गुंडूराव Dinesh Gundu Rao ने कहा कि कर्नाटक में क्षय रोग (टीबी) के मामलों को शून्य तक लाने के लिए विभाग व्यापक स्तर पर प्रयास कर रहा है। टीबी का इलाज पूरी तरह मुफ्त है और जांच या उपचार के लिए किसी तरह का डर या हिचक नहीं होना चाहिए।

स्वस्थ होने वाले मरीजों की संख्या में लगातार वृद्धि

मंत्री ने बताया कि टीबी Tuberculosis एक संक्रामक बीमारी है, लेकिन समय पर उपचार से इससे पूरी तरह ठीक हुआ जा सकता है। वर्ष 2024 में राज्य में 88 फीसदी मरीज स्वस्थ हुए थे, जबकि 2025 में 75,318 मामले दर्ज किए गए। स्वस्थ होने वाले मरीजों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है।उन्होंने कहा कि राज्य में सामने आने वाले टीबी के कुल मामलों में करीब 20 फीसदी हिस्सेदारी रायचूर, धारवाड़, बल्लारी, कोप्पल और यादगीर जिलों की है।

स्वास्थ्य कार्यकर्ता घर-घर जाकर लक्षणों की जानकारी जुटा रहे हैं

सरकार ‘टीबी मुक्त ग्राम पंचायत’ अभियान चला रही है। स्वास्थ्य कार्यकर्ता घर-घर जाकर लक्षणों की जानकारी जुटा रहे हैं और लोगों को जागरूक कर रहे हैं। आशा और अन्य स्वास्थ्य कार्यकर्ता भी लगातार निगरानी और जनजागरूकता का काम कर रहे हैं। मंत्री ने कहा कि बुखार, लगातार खांसी, रात में पसीना, बलगम में खून और थकान जैसे लक्षण होने पर तुरंत चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकारी अस्पतालों में टीबी की जांच और इलाज पूरी तरह मुफ्त उपलब्ध है।

राज्य में टीबी की जांच और उपचार के लिए एक विस्तृत नेटवर्क बनाया गया है, जिसमें 1 राज्य स्तरीय प्रशिक्षण केंद्र, 32 जिला केंद्र, 284 टीबी यूनिट, 1893 माइक्रोस्कोपी केंद्र और 166 सीबी-एनएएटी तथा 475 ट्रू-एनएएटी मशीनों से लैस परीक्षण प्रयोगशालाएं शामिल हैं।

सरकारी अस्पतालों में नहीं हाेगी दवाओं की कमी

सरकारी अस्पतालों में दवाइयों की कमी के मुद्दे पर मंत्री ने कहा कि कल्याण कर्नाटक के सात जिलों में दवाइयों की आपूर्ति की जा चुकी है। 534 दवाओं में से 496 के लिए टेंडर जारी किए गए हैं और 230 से अधिक के लिए अनुबंध भी हो चुके हैं।

उन्होंने कहा, जहां कुछ दवाइयां उपलब्ध नहीं हैं, वहां स्थानीय स्तर पर खरीद के लिए धन जारी किया गया है ताकि किसी प्रकार की कमी न हो। वर्ष 2026-27 के लिए दवा खरीद की प्रक्रिया जून माह से ही शुरू कर दी जाएगी। कर्नाटक राज्य चिकित्सा आपूर्ति निगम लिमिटेड के प्रशासन को मजबूत किया गया है और एक आइएएस अधिकारी को इसका प्रमुख बनाया गया है। इससे टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित होगी।

उन्होंने भरोसा दिलाया कि राज्य में दवाओं की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी और सभी जिला स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ लगातार समन्वय बनाए रखा जा रहा है।

Updated on:
24 Mar 2026 05:23 pm
Published on:
24 Mar 2026 05:23 pm