
पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दारमैया। फाइल फोटो- आईएएनएस
बेंगलुरु। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के नेतृत्व में आयोजित पहली कांग्रेस विधायक दल की बैठक से कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दारमैया और कई वरिष्ठ विधायकों की दूरी ने सत्ताधारी कांग्रेस के भीतर छिपी नाराजगी को सतह पर ला दिया है। विधानसभा सत्र के दौरान यहां एक निजी होटल में हुई यह बैठक शिवकुमार ने विपक्ष का मुकाबला करने के लिए एक संयुक्त रणनीति बनाने के मकसद से बुलाई थी, लेकिन बेंगलुरु में होने के बावजूद सिद्दारमैया और कई वरिष्ठ कांग्रेस विधायकों के बैठक में शामिल न होने से इस बैठक को एक नया राजनीतिक रंग मिल गया।
इससे हाल ही में हुए नेतृत्व परिवर्तन और मंत्रिमंडल विस्तार के बाद पार्टी के भीतर असंतोष की अटकलों को और हवा मिली। बैठक से दूर रहने वालों में सर्वश्री एचसी महादेवप्पा, शिवानंद पाटिल, एम कृष्णप्पा, प्रियाकृष्ण, एमसी सुधाकर, एसएन नारायणस्वामी और कोथनूर मंजूनाथ शामिल थे। बताया जा रहा है कि ये सभी विस्तारित मंत्रिमंडल में जगह न मिलने से नाराज हैं। शिवकुमार एकता का संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं और विधायकों से कह रहे हैं कि कांग्रेस को एकजुट रहना चाहिए और विधानसभा सत्र के दौरान भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और जनता दल (एस) का मिलकर मुकाबला करना चाहिए।
प्राप्त जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री ने मंत्री बनने के इच्छुक नेताओं की निराशा को समझने की कोशिश की और कहा कि कई वरिष्ठ नेताओं के मंत्रिमंडल में जगह पाने के काबिल होने के बावजूद, सभी को शामिल करना मुमकिन नहीं था। शिवकुमार ने विधायकों से सहयोग मांगते हुए कहा कि मैं भी उस दर्द को महसूस करता हूं। उन्होंने विधायकों को निर्देश दिया कि वे सदन में अपनी मौजूदगी बनाए रखें, सरकार का बचाव करें और विपक्ष के हमलों का जवाब देते समय मंत्रियों का साथ दें।
उन्होंने उनसे भाजपा का मुकाबला करने और उसके घोटालों को उजागर करने के लिए भी कहा। शिवकुमार ने विधायकों से मंत्री बी. नागेंद्र को पूरा समर्थन देने और यह सुनिश्चित करने को कहा कि सदन में विपक्ष हावी न हो। मुख्यमंत्री ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर), सूखे, फसल बीमा, पशुधन, पीने के पानी की सप्लाई और आने वाले स्थानीय निकाय चुनावों पर भी ज्यादा ध्यान देने को कहा। उन्होंने विधायकों को भरोसा दिलाया कि हर महीने दो दिन विधायकों के साथ सीधी बातचीत के लिए तय किए जाएंगे और संकेत दिया कि निर्वाचन क्षेत्र के मुद्दों (जिसमें ग्रांट भी शामिल है) पर ध्यान दिया जाएगा।
ये घटनाक्रम कांग्रेस के लिए राजनीतिक रूप से संवेदनशील है क्योंकि सरकार को विधानसभा में आक्रामक विपक्ष का सामना करना पड़ रहा है, जबकि पार्टी नेतृत्व में बदलाव के बाद खुद को मजबूत दिखाने की कोशिश कर रही है। शिवकुमार की पहली कांग्रेस विधायक दल (सीएलपी) की बैठक में सिद्दारमैया और निराश विधायकों के समूह की गैर-मौजूदगी को एक अहम राजनीतिक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है, जबकि मुख्यमंत्री ने एकता और विपक्ष के खिलाफ एकजुट होकर लड़ने का आह्वान किया था।
Updated on:
19 Aug 2026 04:05 pm
Published on:
19 Aug 2026 03:59 pm
