बैंगलोर

कम्बार बोले : सम्मेलन में पारित प्रस्ताव रस्म अदायगी नहीं

साहित्य सम्मेलन में शिक्षा के हालात पर मंथन
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Updated: 29 Sep 2018, 7:26 PM IST
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कम्बार बोले : सम्मेलन में पारित प्रस्ताव रस्म अदायगी नहीं

बेंगलूरु. अखिल भारतीय कन्नड़ साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष डॉ ंचंद्रशेखर कंबार ने कहा कि इस वर्ष दिसंबर में धारवाड़ में होने वाले 84 वें सम्मेलन में सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता, अंग्रेजी माध्यम में शिक्षा की आवश्यकता, बेरोजगारी तथा उत्तर कर्नाटक का संतुलित विकास जैसे मामलों पर चिंतन होगा।

उन्होंने यहां शुक्रवार को कहा कि हर बार साहित्य सम्मेलनों में प्रस्ताव पारित करने की रस्म अदायगी की जाती है। ऐसे प्रस्तावों की अधिकतर अनदेखी की जा रही है। इस बार सम्मेलन में विचार-विमर्श के बाद पारित प्रस्तावों के क्रियान्वयन के विशेष प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि कन्नड़ साहित्य के विकास के लिए उत्तर कर्नाटक तथा हैदराबाद-कर्नाटक के साहित्यकारों का भी काफी योगदान रहा है।

उल्लेखनीय है कि बेलगावी जिले के हुक्केरी तहसील के घोडगेरी गांव में वर्ष 1937 में जन्मे डॉ चंद्रशेखर कंबार को ज्ञापनीठ पुरस्कार समेत, केंद्रीय साहित्य अकादमी पुरस्कार, राज्योत्सव पुरस्कार से नवाजा गया है। अब 60 वर्ष के अंतराल के बाद धारवाड़ में हो रहे 84 वें अखिल भारतीय कन्नड़ साहित्य सम्मेलन का अध्यक्ष बनने का अवसर मिला है। 7 से 9 दिसंबर तक होने वाले तीन दिवसीय साहित्य सम्मेलन में राज्य के 30 जिलों के साथ-साथ महाराष्ट्र, गोवा, केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश तथा दिल्ली कन्नड़ साहित्य परिषद इकाइयों के प्रतिनिधि भाग लेंगे।

दो वर्ष पुराने प्रश्न पूछे जाने से नर्सिंग विद्यार्थी खफा
बेंगलूरु. राजीव गांधी स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय (आरजीयू एचएस) परीक्षा को लेकर फिर विवादों में है। इस बार प्रश्न पत्र को लेकर। हालांकि नियमों का हवाला देते हुए आरजीयूएचएस ने इस विवाद को निराधार बताया है। बुधवार को एमएससी (नर्सिंग) के प्रबंधन विषय के पर्चा के बाद यह विवाद सामने आया। परीक्षार्थियों ने बताया कि इस बार पूछे गए कुल आठ प्रश्नों के समूह में से छह समूह वर्ष 2016 के प्रश्न पत्र से पूर्ण रूप से मेल खाते हैं। परीक्षार्थियों ने फिर से परीक्षा कराने की मांग की है।

इनके अनुसार जिन परीक्षार्थियों ने पुराने प्रश्न पत्र से भी तैयारी की है वे ज्यादा फायदे में हैं। हालांकि आरजीयूएचएस के अधिकारियों का कहना है कि प्रश्न पत्र सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध है। जहां तक प्रश्न पत्र के मेल खाने का सवाल है तो ऐसा कोई नियम नहीं है जो किसी भी विवि को ऐसे प्रश्न पत्र तैयार करने से रोके जो पुराने प्रश्न पत्रों से मेल खाते हों।इसलिए फिर से परीक्षा कराने का सवाल नहीं उठता है।

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