जून और जुलाई महीने में औसत से 17 प्रतिशत कम हुई बारिश
बेंगलूरु. मानसून की मेहरबानी के कारण एक ओर जहां राज्य के अधिकांश जलाशय लबालब हो चुके हैं और कृषि गतिविधियां अपने समय अनुरूप चल रही हैं, वहीं दूसरी ओर बादलों की लुकाछिपी के बीच बेंगलूरु में पिछले दो महीने के दौरान औसत से कम बारिश हुई है।
भारतीय मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार जून और जुलाई महीने में बेंगलूरु में औसत से 17 प्रतिशत कम बारिश हुई है। जून महीने में शहर में 91.5 मिलीमीटर (मिमी) बारिश हुई जो औसम 106.5 मिमी से करीब 14 फीसदी कम है। इसी प्रकार जुलाई महीने में 30 जुलाई की रात तक शहर में 79.5 मिमी बारिश हुई थी जो सामान्य से करीब 33 मिमी कम है।
जून और जुलाई महीने को दक्षिण पश्चिम मानसून के लिहाज से बेहद अहम महीना माना जाता है। मानसून के इन दो शुरुआती महीनों की बारिश दीर्घावधि में सर्वाविध प्रभावी माने जाते हैं। राज्य के अन्य क्षेत्रों में इन दो महीनों में औसत से ज्यादा बारिश भी हुई है लेकिन बेंगलूरु इस मामले में खुशनसीब नहीं रहा है। कर्नाटक राज्य प्राकृतिक आपदा निगरानी केन्द्र द्वारा राज्य में बारिश पर नजर रखने के लिए 6000 बारिश निगरानी केन्द्र संचालित हैं।
बेंगलूरु में बारिश के संबंध में जारी किए गए आंकड़ों में कहा गया है कि बेंगलूरु में इस बार अब तक औसत से 27 प्रतिशत कम बारिश हुई है, जबकि पड़ोसी जिले कोलार में करीब 23 प्रतिशत कम बारिश हुई है। कोलार को राज्य में सर्वाधिक शुष्क जिला माना जाता है और पिछले कई वर्षों में यहां औसत से कम बारिश होती रही है।
मौसम विभाग के अनुसार राज्य के अलग अलग भागों में बारिश की भिन्न स्थिति रही है। उत्तर अंदरूनी कर्नाटक के जिलों में औसत से कम बारिश हुई है, जबकि दक्षिण अंदरूनी कर्नाटक में बेंगलूरु और कोलार को छोड़कर शेष जिलों में सामान्य से सामान्य से ज्यादा बारिश हुई है। यही कारण है कि कावेरी नदी स्थित सभी चार जलाशय जुलाई महीने में पूरी तरह लबालब हो गए हैं और ऐसा बीस साल बाद हुआ है। लेकिन शुरुआती दौर में हुई अच्छी बारिश के बावजूद कुछ खतरे भी सामने दिख रहे हैं।
भूजलस्तर नीचे जाने का खतरा
मौसम विशेषज्ञों ने बेंगलूरु में मानसून के दौरान कम बारिश होने को गंभीर चिंता का विषय बताया है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे भूजल स्तर नीचे जा सकता है। बेंगलूरु शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित 144 भिन्न किस्म के जलाशयों में मात्र 14 में ही आधी क्षमता से ज्यादा पानी है। आने वाले दिनों में भी अगर बारिश की यही स्थिति रही तो दीर्घकालिक रूप से यह बेंगलूरु के भूजलस्तर के लिए खतरनाक संकेत है।