
बेंगलूरु. 54वें अतिरिक्त सिटी सिविल न्यायालय की न्यायाधीश एम.लता कुमारी ने सात वर्षीया लड़की का बलात्कार करने के आरोप में एक ऑटो चालक लक्ष्मण (52) को उम्र कैद और 50 हजार रुपए का जुर्माना लगाया। आरोपपत्र के अनुसार गत 11, दिसंबर 2015 को बनशंकरी दूसरे स्टेज इट्टुमडू के पीजीलेआउट निवासी एक व्यापारी ने किसी जरूरी काम के सिलसिले में अपनी पुत्री को घर पर छोड़ गया था। उसकी पत्नी शिक्षक है और स्कूल गई थी। आरोपी लक्ष्मण उनका पड़ोसी था।
उसने मौके का लाभ उठाया और पीडि़ता को आइस्क्रीम दिलाने के बहाने अपने घर ले जाकर बलात्कार किया। उसने बच्ची को धमकी दी थी कि अगर उसने किसी को कुछ बताया तो उसकी हत्या कर देगा। पीडि़ता ने डर कर किसी को यब बात नहीं बताई थी। कुछ दिन बाद बच्ची को पेट में दर्द होने पर उसे निजी अस्पताल मे भर्ती कराया गया। महिला चिकित्सक ने जांच कर बताया कि उसके साथ बलात्कार हुआ है।
शिकायत पर सीके अच्चूकट्टू पुलिस थाने के पुलिस निरीक्षक कृष्णप्पा ने मामले की जांच की और आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया था। न्यायालय ने आरोपी को उम्रकैद के साथ 50 हजार रुपए का जुर्माना लगाया। न्यायालय ने जुर्माने की राशि पीडि़ता को देने का आदेश दिया। सरकारी वकील सी.नाणय्या ने मुकदमे की पैरवी की थी।
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राज्य सरकार ने वापस ली अधिसूचना
दान-पात्रों की राशि मुख्यमंत्री राहत कोष में जमा करने का आदेश
बेंगलूरु. राज्य सरकार ने हाल में देवस्थानम विभाग के अंतर्गत शामिल 32 हजार से अधिक मंदिरों के दान पात्रों की राशि मुख्यमंत्री राहत कोष में जमा करने के लिए अधिसूचना जारी की थी। इसके खिलाफ शुक्रवार को गिरिश भारद्वाज नामक व्यक्ति ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर इसे निरस्त करने की मांग की थी। पता चलते ही राज्य सरकार ने उच्च न्यायालय में हलफनामा दायर कर अधिसूचना में संशोधन करने की बात कही। संशोधन के तहत मंदिरों के प्रशासन बोर्ड के स्वप्रेरित दान राशि को इस राहत कोष में जमा करने की बात कही गई। इसके बाद याचिकाकर्ता ने याचिका वापस लेने की घोषणा कर दी।