
बेंगलूरु. राजाजीनगर स्थानक में साध्वी संयमलता, साध्वी अमितप्रज्ञा, कमलप्रज्ञा, सौरभप्रज्ञा के सान्निध्य में भगवान मुनि सुव्रत स्वामी का अनुष्ठान संपन्न हुआ। इस मौके पर साध्वी संयमलता ने कहा कि जीवन में आने वाले अमंगल को रोकने के लिए, घर परिवार में स्नेह, शांति और शक्ति की स्थापना के लिए, दुष्ट शक्तियों से, आधि-व्याधि से बचने के लिए बीमारी से छुटकारा पाने भगवान मुनिसुव्रत स्वामी का अनुष्ठान लाभदायक है। यह अनुष्ठान सम्यक श्रद्धा तथा आत्म शक्ति के जागरण करने का एक अद्भुत उपाय है।
साध्वी अमितप्रज्ञा व साध्वी कमलप्रज्ञा ने मंत्र का सामूहिक गान किया। प्रारंभ में पांच सहजोड़ों ने मंगल कलश की स्थापना की। सोहनलाल, विनोद कुमार, राजेश कुमार, विजयेश कुमार श्रीश्रीमाल ने जाप किया। ममता मखाणा ने 29, डिम्पल बोहरा ने 25 उपवास के प्रत्याख्यान ग्रहण किए। मंत्री ज्ञानचंद लोढ़ा ने बताया कि एक सितम्बर को तपोभिनंदन का आयोजन होगा।
पाप करने वाला अवश्य भोगता है फल
वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ फै्रजर टाउन में साध्वी निधि ज्योति ने श्रावक के छठे गुण, पाप भीरुता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पाप भीरुता का अर्थ पाप कार्यों से डरते रहना। जो पाप कर्म से डरता है, उसे फिर और किसी से डरने की आवश्यकता नहीं रहेगी। डर उसे ही होता है जो पाप कार्य करता है। जो सदा धर्म कार्यों में लगा रहता है वह सदा निर्भय होकर रहता है। इसके विपरीत जो पाप कार्यों में लगे रहते हैं उन्हें हजारों भय घेरे रहते हैं अर्थात जो पाप कार्यों से डरते हैं उन्हें एक यही भय रहता है किंतु जो पाप के भय को जीत लेता है उसे दूसरे हजारों भयों का सामना करना पड़ता है। पाप कर्म करने वाले जीव को इस संसार में विविध प्रकार के दुख भोगने पड़ते हैं।
अत: यदि सुख चाहते हैं तो पाप कार्यों से सर्वथा दूर रहना चाहिए। जो पाप करता है उसे उसका फल अवश्य भोगना पड़ता है। हम देखते हैं कि संसार के सभी प्राणी सुख चाहते हैं जैसा कि प्रभु महावीर ने कहा कार्य भी वैसे ही करने चाहिए जिससे सुख मिले दया दान सेवा, त्याग, तपस्या आदि पुण्य के कार्य करने से सुख मिलता है परंतु हम यह भी प्रत्यक्ष देखते हैं कि ज्यादा मानव झूठ, चोरी, हिंसा अत्याचार और दुराचार में अधिक रुचि रखते हैं। ऑल इण्डिया कांफ्रेंस के चेयरमैन केसरीमल बुरड़, जयंतीलाल उपस्थित थे। संचालन उत्तम चुतर ने किया।