
बेंगलूरु. गठबंधन सरकार के पहले मंत्रिमंडल विस्तार में मौका नहीं मिलने से वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं में नाराजगी है। कांग्रेस आलाकमान ने पहले विस्तार में नए चेहरों के मौका देने और जातीय व क्षेत्रीय समीकरणों को साधने की कोशिश की है जिसके कारण पिछली सिद्धरामय्या सरकार मेंं मंत्री रहे अधिकांश कद्दावर नेता दुबारा पद पाने से वंचित रह गए। कांग्रेस ने लिंगायत समुदाय के चार वरिष्ठ नेताओं-एम बी पाटिल, शामनूर शिवशंकरप्पा, एच के पाटिल और ईश्वर खंड्रे को मंत्री नहीं बनाया और इसे लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का दौर जारी है। विधानसभा से करीब 6 महीने पहले तक लिंगायत मसला छाया रहा था।
अलग लिंगायत धर्म के मसले पर काफी आक्रामक रहे पूर्व जल संसाधन मंत्री एम बी पाटिल और सिद्धरामय्या सरकार की लिंगायतों को अल्पसंख्यक का दर्जा देने का विरोध करने वाले वीरशैव महासभा के अध्यक्ष व पूर्व मंत्री शामनूर शिवशंकरप्पा को कांगे्रस ने मंत्री नहीं बनाया। दोनों का नाम शुरुआती दौर की सूची में था लेकिन अंतिम समय में दोनों का पत्ता कट गया। मंत्री नहीं बनने से कोई विधायक इस्तीफे की धमकी दे रहा तो किसी के समर्थन में पार्टी के पदाधिकारी इस्तीफा दे रहे हैं।
सिद्धरामय्या सरकार में मंत्री रहे दिग्ग नेता- आर रोशन बेग, आर रामलिंगा रेड्डी, एच के पाटिल, तनवीर सेत और सतीश जारकीहोली भी मंत्री नहीं बन पाए। नए चेहरों में पूर्व मुख्यमंत्री एन धरम सिंह के बेटे अजय सिंह और सिद्धरामय्या के बेटे डॉ यतींद्र को भी मौका नहीं मिल पाया।
अंतिम सूची में एम बी पाटिल का नाम नहीं होने उनके समर्थकों ने नए मंत्रियों के शपथ लेने से पहले प्रदर्शन किया।
एम बी पाटिल के सदाशिवनगर स्थित आवास पर जुटे समर्थकों ने कांग्रेस नेताओं के खिलाफ नारेबाजी की तो विजयपुर के बसवेश्वर चौरहे पर भी समर्थकों ने उन्हें मंत्री बनाने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। पाटिल से मिलने पहुंचे कृष्णाबैरे गौड़ा को भी पाटिल के समर्थकों की नाराजगी झेलनी पड़ी। बाद में पत्रकारों से बातचीत में पाटिल ने कहा कि वे अगला कदम उठाने से पहले पार्टी आलाकमान से बातचीत करेंगे।
पाटिल के समर्थकों ने विजयपुर में भी प्रदर्शन किया। एक समर्थक ने आत्मदाह की भी कोशिश की। पूर्व विधायक रमेश बंडी सिद्धेगौड़ा, एच सी बालकृष्णा व एन चलुवराय स्वामी भी पाटिल से मिलने उनके आवास पर पहुंचे। उधर, पूर्व मंत्री विनय कुलकर्णी ने भी पाटिल को मंत्री नहीं बना जाने पर नाराजगी जताते हुए कहा कि इससे उत्तर कर्नाटक की उपेक्षा जैसा अहसास हो रहा है। पाटिल के समर्थकों ने डी के शिवकुमार के सदाशिवनगर स्थित आवास का भी घेरव किया और उन्हें विजयपुर में प्रवेश नहीं करने देने की चेतावनी दी।