साध्वी कंचनप्रभा ने कहा कि भगवान महावीर की वाणी के अनुसार साधु-साध्वियां वर्षा ऋतु में एक स्थान पर रहते हैं
बेंगलूरु. जैन श्वेताम्बर तेरापंथ सभा बेंगलूरु में साध्वी कंचनप्रभा का चातुर्मास मंगल प्रवेश व अभिनंदन समारोह आयोजित किया गया। नेहरू नगर से गांधीनगर तक अहिंसा रैली निकाली गई, जहां साध्वी मधुस्मिता ने साध्वी कंचनप्रभा का स्वागत किया। वे विजयनगर से विहार कर गांधीनगर भवन पहुंची। रैली धर्मसभा में परिवर्तित हो गई।
साध्वी कंचनप्रभा ने कहा कि भगवान महावीर की वाणी के अनुसार साधु-साध्वियां वर्षा ऋतु में एक स्थान पर रहते हैं। अहिंसा महाव्रत की आराधना करते हुए प्राणी मात्र के प्रति अनुकम्पा का भाव रखते हैं, क्योंकि वर्षा ऋतु जीवोत्पति का विशेष समय है। उन्होंने कहा कि सभी आचार्य के चातुर्मास की तैयारी करें।
तेरापंथ सभा, तेयुप, तेरापंथ ट्रस्ट, महिला मंडल, अणुव्रत समिति, उपनगरीय सभा द्वारा रैली के साथ चातुर्मासप्रवास प्रवेश, स्वागत किया गया। साध्वी मंजूरेखा ने कहा कि आचार्य के पधारने की खुशी का रंग समाज में नजर आ रहा है। साध्वी मधुस्मिता ने साध्वियों के चातुर्मास की सफलता की कामना की। साध्वी उदित प्रभा ने कहा कि चातुर्मास आत्मसंयम का मौसम है। तेरापंथ सभा अध्यक्ष मूलचंद नाहर ने स्वागत किया।
महासभा उपाध्यक्ष कन्हैयालाल गिडिय़ा, तेरापंथ महिला मंडल अध्यक्षा अनीता गांधी, तेरापंथ ट्रस्ट अध्यक्ष बहादुर सेठिया, तेयुप अध्यक्ष सुनील बाबेल, अणुव्रत समिति अध्यक्ष कन्हैयालाल चिप्पड़, अभातेयुप अध्यक्ष विमल कटारिया सहित अन्य पदाधिकारियों ने भी विचार व्यक्त किए। अहिंसा रैली संजोयक सभा किशोर गादिया, तेयुप संयोजक उमेश बरडिय़ा एवं आलोक बेंगवानी ने रैली का नेतृत्व किया। गीतिका से साध्वीवृन्द का सम्मान किया। संचालन मंत्री प्रकाश लोढ़ा ने किया। सहमंत्री संजय बांठिया ने धन्यवाद दिया।
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धूमधाम से मनाया भगवान नेमिनाथ का निर्वाण कल्याणक
बेंगलूरु. साउथ एण्ड सर्कल स्थित आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में चक्रेश्वरी महिला समाज के तत्वावधान में आचार्य कुमुदनंदी एव मुनि अर्पण सागर के सान्निध्य में जैन धर्म के 22वे तीर्थंकर नेमिनाथ भगवान का निर्वाण कल्याणक धूमधाम से मनाया गया। इस अवसरपर भगवान का 108 कलशों से अभिषेक के बाद वृहद शांतिधारा की गई। धर्मसभा में आचार्य ने कहा कि धर्म सर्व सुख की खान है एवं हितकारी है। इसलिए बुद्धिमान धर्म मत संचय करते हैं। धर्म की शरण स्वीकार करते हैं। इस धर्म को नमस्कार है। संसार में धर्म ही सबसे बड़ा मित्र है।