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नीट परिणाम से पहले ही अभ्यर्थियों का सत्यापन शुरू

इस बार नीट NEET परिणाम का इंतजार किए बिना पहले से जानकारी एकत्र की जा रही है, ताकि परिणाम घोषित होने के बाद प्रक्रिया तेजी से पूरी की जा सके और अंतिम समय की परेशानियों से बचा जा सके।
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बैंगलोर

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Nikhil Kumar

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Updated: 8 May 2026, 6:36 PM IST

कर्नाटक परीक्षा प्राधिकरण

कर्नाटक परीक्षा प्राधिकरण

- प्रवेश प्रक्रिया को तेज करने की तैयारी

-केईए ने नीट यूजी रोल नंबर और एडमिट कार्ड अपलोड करने को कहा

कर्नाटक परीक्षा प्राधिकरण (केईए) ने यूजीसीईटी (कॉमन एंट्रेंस टेस्ट सीइटी) 2026 के लिए आवेदन करने और राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) यूजी परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों से जानकारी जुटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। केईए Karnataka Examinations Authority के कार्यकारी निदेशक एच. प्रसन्ना ने बताया कि अभ्यर्थियों को अब अपना नीट यूजी NEET-UG रोल नंबर, आवेदन संख्या और नीट यूजी एडमिट कार्ड ऑनलाइन लिंक के माध्यम से अपलोड करना होगा।

अंतिम समय की परेशानियों से बचा जा सके

यह कदम कर्नाटक में मेडिकल और संबद्ध स्वास्थ्य विज्ञान पाठ्यक्रमों में प्रवेश प्रक्रिया को सुचारु बनाने के लिए उठाया गया है। पिछले वर्षों में कई अभ्यर्थी नीट National Eligibility-cum-Entrance Test परिणाम घोषित होने के बाद पंजीकरण और दस्तावेज सत्यापन प्रक्रिया शुरू करते थे। इसके कारण काउंसलिंग की अंतिम तिथि के करीब भारी भीड़, देरी और तकनीकी समस्याएं सामने आती थीं। इस बार नीट NEET परिणाम का इंतजार किए बिना पहले से जानकारी एकत्र की जा रही है, ताकि परिणाम घोषित होने के बाद प्रक्रिया तेजी से पूरी की जा सके और अंतिम समय की परेशानियों से बचा जा सके।

रोल नंबर दर्ज करना अनिवार्य

केईए ने नीट यूजी परीक्षा में शामिल सभी अभ्यर्थियों से जल्द से जल्द पोर्टल पर अपनी जानकारी दर्ज करने की अपील की है। केईए ने स्पष्ट किया कि राज्य कोटा और नीट अंकों से जुड़े मेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश के इच्छुक अभ्यर्थियों के लिए इस चरण में नीट रोल नंबर दर्ज करना अनिवार्य है। हालांकि, केवल नीट यूजी 2026 में सफल होने वाले अभ्यर्थियों को ही परिणाम घोषित होने के बाद विकल्प चयन और काउंसलिंग प्रक्रिया में भाग लेने की अनुमति दी जाएगी।

तकनीकी दिक्कतों में भी कमी आएगी

वर्तमान प्रक्रिया मुख्य रूप से अग्रिम सत्यापन और डाटा तैयार करने के लिए की जा रही है। केईए का मानना है कि इससे दस्तावेज सत्यापन, सीट मैट्रिक्स तैयार करने और काउंसलिंग कार्यक्रम तय करने की प्रक्रिया तेज होगी। साथ ही पंजीकरण के दौरान सर्वर पर बढऩे वाले दबाव और तकनीकी दिक्कतों में भी कमी आएगी।