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अजनबी दिलीप के स्टेम सेल ने थामी समीक्षा की जिंदगी की डोर

वर्षों तक खून चढ़वाने और इलाज के बीच गुजरी जिंदगी में पहली बार उसने उस शख्स से मुलाकात की, जिसने उसे जीने की नई उम्मीद दी।
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बैंगलोर

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Nikhil Kumar

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Updated: 8 May 2026, 6:20 PM IST

विश्व थैलेसीमिया दिवस

नन्ही समीक्षा अपने स्टेम सेल डोनर दिलीप के साथ। अभिभावक, चिकित्सक व अन्य साथ में।

विश्व थैलेसीमिया दिवस World Thalassemia Day से एक दिन पहले गुरुवार को दोनों की पहली मुलाकात हुई। एक जेनेटिक मैच Genetic Match से जुड़ी दो जिंदगियां जब आमने-सामने आईं, तो माहौल भावनाओं से भर गया।

समीक्षा (12) के लिए यह दिन किसी नए जीवन से कम नहीं था। वर्षों तक खून चढ़वाने और इलाज के बीच गुजरी जिंदगी में पहली बार उसने उस शख्स से मुलाकात की, जिसने उसे जीने की नई उम्मीद दी। राज्य के कोलार निवासी 27 वर्षीय आईटी पेशेवर दिलीप के. वही स्टेम सेल डोनर Stem Cell Donor हैं, जिनकी वजह से समीक्षा अब अपना जीवन आम बच्चों की तरह बिता रही है। समीक्षा ने मुस्कुराते हुए कहा, अब मैं खुश हूं। मैं दूसरे बच्चों की तरह खेल सकती हूं और स्कूल जा सकती हूं।

तब ज्यादा नहीं सोचा था

इस भावुक मुलाकात के दौरान गैर-लाभकारी रक्त स्टेम सेल डोनर केंद्र डीकेएमएस DKMS ने भारत में ट्रांसफ्यूजन-डिपेंडेंट (रक्ताधान पर निर्भर) थैलेसीमिया से पीडि़त 12 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए मुफ्त ह्यूमन ल्यूकोसाइट एंटीजन (एचएलए) टाइपिंग की घोषणा की। इस पहल का उद्देश्य स्टेम सेल प्रत्यारोपण Stem Cell Transplant तक पहुंच आसान बनाना और डोनर का इंतजार कर रहे हजारों बच्चों को नई उम्मीद देना है। दिलीप ने बताया कि जब उन्होंने स्टेम सेल डोनर के तौर पर पंजीकरण कराया था, तब ज्यादा नहीं सोचा था। आज समीक्षा से मिलकर महसूस हुआ कि किसी की खुशी की वजह बनने से बढकऱ कुछ भी नहीं है। वह जिंदगी से भरी हुई है।

हार नहीं मानी

समीक्षा के परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण डीकेएमएस ने इलाज और स्टेम सेल ट्रांसप्लांट के लिए आर्थिक सहायता भी दी। संस्था के पेशेंट फंडिंग कार्यक्रम के तहत जरूरतमंद मरीजों को आंशिक वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।समीक्षा के पिता ने कहा, हमने वर्षों तक डोनर का इंतजार किया। कई बार उम्मीद टूटती लगी, लेकिन हमने हार नहीं मानी। दिलीप से मिलना हमारे लिए सपने जैसा है।

बीटा थैलेसीमिया मेजर का पता चला

जब समीक्षा पहली बार हमारे पास आई थी, तब वह केवल कुछ महीने की थी। शुरुआती अवस्था में ही उसमें बीटा थैलेसीमिया मेजर का पता चल गया था, जिससे हमें सही समय पर उसका उपचार शुरू करने में मदद मिली। हालांकि, स्टेम सेल प्रत्यारोपण ही उसके लिए एकमात्र स्थायी उपचार विकल्प था। जब दिलीप का मैच मिला, तो यह हमारी पूरी टीम के लिए बेहद राहत और खुशी का क्षण था। कहीं कोई व्यक्ति स्टेम सेल डोनर के रूप में पंजीकरण कराने का निर्णय ले, तो वह किसी की जिंदगी बचा सकता है।

-डॉ. सिद्धेश कलंत्री

...ताकि जीवन का दूसरा मौका मिल सके

डीकेएमएस के अनुसार भारत में थैलेसीमिया के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। हर वर्ष 10 हजार से ज्यादा बाल मरीजों की पहचान होती है। देश में हर वर्ष रक्त विकारों के लगभग एक लाख नए मामले सामने आते हैं। भारतीय आबादी का केवल 0.04 संभावित रक्त स्टेम सेल दाताओं के रूप में पंजीकृत हैं। यह अन्य देशों की तुलना में काफी कम है। अधिक से अधिक भारतीयों के लिए पंजीकरण करना महत्वपूर्ण है ताकि रक्त कैंसर और अन्य रक्त विकारों के अधिक से अधिक मरीजों को जीवन में दूसरा मौका मिल सके।