
सिद्धारमैया(Photo-IANS)
Karnataka vs Center Supreme Court: कर्नाटक सरकार ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार अधिनियम (मनरेगा) की बहाली के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख अपनाया है। केंद्र सरकार ने VB-G RAM G एक्ट, 2025 को चुनौती देते हुए इसे खारिज कर दिया है। राज्य सरकार ने कहा है कि नए कानून के लागू न होने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार का बड़ा संकट पैदा हो गया है।
कर्नाटक सरकार के अनुसार, संसद द्वारा वीबी-जी राम जी अधिनियम, 2025 पारित कर मनरेगा को प्रतिस्थापित किया गया था, लेकिन केंद्र सरकार ने अभी तक इस नए कानून को अधिसूचित नहीं किया है। नियम-कानून नहीं बनाए गए, दिशा-निर्देश जारी नहीं किए गए और कोई वैकल्पिक व्यवस्था लागू नहीं की गई। इस ग्राम्य रचना की कलाकृतियों पर गहरा प्रभाव पड़ा है। राज्य सरकार का कहना है कि इस नीतिगत निर्वात (खालीपन) के कारण लाखों परिवार प्रभावित हो रहे हैं।
7 मई को कर्नाटक सरकार की बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा हुई और निर्णय लिया गया कि कानूनी लड़ाई लड़की जाएगी। कानून मंत्री एच.के. कैबिनेट की बैठक के बाद कैबिनेट ने मीडिया को बताया कि कैबिनेट ने वीबी-जी राम-जी एक्ट को चुनौती देने का फैसला किया है। हम इस कानून के कोर्ट में जाएंगे। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ग्रामीण उद्योगों की रक्षा के लिए सत्य और सुनिश्चित मांग करती है कि रोजगार से जुड़े कार्यकर्ता प्रभावित न हों।
मनरेगा भारत के ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण स्तंभ है। यह योजना ग्रामीण परिवारों को प्रति वर्ष कम से कम 100 दिनों का सामान्य रोजगार प्रदान करती थी। केंद्र द्वारा इसे वीबी-जी राम-जी एक्ट (विकसित भारत-रोजगार एवं उपभोक्ता मिशन ग्रामीण) के फैसले से कई राज्यों में असंतोष है। कर्नाटक का तर्क है कि नए कानून को लागू करने के लिए केंद्र की देरी से बैंकों और वित्तीय संस्थानों का जन्म हुआ है। राज्य सरकार अब सुप्रीम कोर्ट से मनरेगा के तहत इस साल की कार्ययोजना बनाने और लागू करने की मांग करेगी।
Updated on:
08 May 2026 07:29 pm
Published on:
08 May 2026 07:29 pm
