
बेंगलूरु. ऑल इंडिया केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन (एआइओसीडी) की ओर से दवाओं की ऑनलाइन बिक्री के विरोध में शुक्रवार को देशव्यापी बंद के समर्थन में प्रदेश में हजारों की संख्या में दुकानें बंद रहीं। हालांकि आपात स्थिति में मरीजों को दवा से वंचित न रहना पड़े इसके लिए अस्पतालों, नर्सिंग होम्स व आपातकालीन सेवाओं से जुड़ी दुकानें हड़ताल से बाहर रही। इस कारण लोगों को विशेष परेशानी नहीं हुई।
ऊपर से जिस इ-फार्मेसी के खिलाफ दवा विके्रताओं ने बंद का समर्थन किया, वहीं कई लोगों के लिए राहत बनी। दवाओं की ऑनलाइन बिक्री पर कोई असर नहीं पड़ा। बंद को सफल बताते हुए कर्नाटक केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन (केसीडीए) के अध्यक्ष आर.रघुनाथ रेड्डी ने कहा कि 20 हजार से भी ज्यादा दुकानदारों ने अपनी दुकानें बंद रखीं।
शहर में भी करीब छह हजार दुकानें बंद थीं। केसीडीए के महासचिव ए. के. जीवन ने कहा कि इ-फार्मेसी महज एक कम्प्यूटर पोर्टल है। वो भी बिना किसी भौतिक भंडार या दवाओं के। जो पारंपरिक दवा दुकान सेवाओं के विपरीत है। इसके बावजूद सरकार इ-फार्मेसी का अधिक प्रचारित कर रही है।
दवाओं की ऑनलाइन बिक्री के मसौदे से 8.5 लाख दवा विके्रताओं की आजीविका पर संकट मंडरा रहा है। एआइओसीडी ने प्रधानमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री को ज्ञापन भेज कर दवाओं की ऑनलाइन बिक्री पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है। सुनवाई नहीं होने की स्थिति में अनिश्चितकालीन हड़ताल करने पर मजबूर हो जाएगा।
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मेडिकल दुकानें बंद रहीं
मंड्या. ऑल इंडिया कैमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के आह्वान पर शुक्रवार को मंड्या शहर में भी मेडिकल बंद रहे। शहर के मुख्य बाज़ार, वीवी रोड, आरपी रोड, 100 फीट रोड, महावीर चौराहा, नंदा टॉकीज सर्कल पर मेडिकल की दुकान बंद रही है। इसी तरह ग्रामीण क्षेत्रों में भी मेडिकल की दुकानें बंद नजर आईं। गांवों में मरीजों को मेडिकल दुकानों की हड़ताल का पता नहीं होने के कारण मरीज मेडिकल की पास की दुकान से जानकारी लेकर निराश होकर लौट गए। इसी तरह जिले के श्रीरंगपट्टण, मद्दूर, केआरपेट, मलवल्ली और नागमंगला तहसील में भी मेडिकल की दुकानें बंद रहीं।