मंड्या जिले के श्रीरंगपट्टण तालुक में स्थित कृष्णराज सागर (केआरएस) बांध का एक गेट अचानक खुलने से 2,000 क्यूसेक से अधिक पानी नदी में बहा दिया गया। केआरएस बांध बेंगलूरु की लाइफ लाइन है क्योंकि वहीं से शहर में पेयजल की सप्लाई होती है
बेंगलूरु. मंड्या जिले के श्रीरंगपट्टण तालुक में स्थित कृष्णराज सागर (केआरएस) बांध का एक गेट अचानक खुलने से 2,000 क्यूसेक से अधिक पानी नदी में बहा दिया गया। केआरएस बांध बेंगलूरु की लाइफ लाइन है क्योंकि वहीं से शहर में पेयजल की सप्लाई होती है।
बताया जा रहा है कि रविवार रात बांध का एक गेट अचानक खुल गया और पानी नदी में बह गया। सोमवार रात गेट को गिरा दिया गया। गर्मी का मौसम आते ही पानी की इस कदर बर्बादी के लिए अधिकारियों की लापरवाही का आरोप लगाया जा रहा है।
जानकारों के अनुसार पानी का दबाव अधिक होने के कारण गेट को बंद करने के लिए कर्मचारियों को काफी मशक्कत करनी पड़ी। बांध का जलस्तर 106 फीट से अधिक था। सूत्रों के अनुसार, घंटों की मशक्कत के बाद अधिकारी गेट को गिराने में सफल रहे।
कावेरी नदी बेसिन के इस अहम केआरएस बांध का जलस्तर 21 जुलाई 2024 से 12 जनवरी 2025 तक रिकॉर्ड 172 दिनों तक (124 फीट तक) रहने के बाद कम होना शुरू हो गया था। कावेरी नीरावरी निगम के अधिकारियों के अनुसार, वर्ष 2000 से यह 2009 में सबसे अधिक 146 दिनों तक भरा रहा।
केआरएस में जलस्तर 20 जनवरी को इसकी क्षमता 124.80 फीट के मुकाबले 122.24 फीट पर आ गया। 12 जनवरी को यह 124.04 फीट था। 20 जनवरी को कावेरी बेसिन के सभी बांधों में 78 प्रतिशत पानी था और उनमें कुल 89.02 टीएमसी फीट पानी था, जबकि उनकी कुल क्षमता 114.57 टीएमसी फीट थी। नवीनतम जानकारी के अनुसार 24 मार्च को बांध में 106.40 फीट पानी था।
कावेरी बेसिन के निचले हिस्से में अतिरिक्त पानी को संग्रहित करने के लिए कोई संतुलन जलाशय नहीं होने और मानसून की अच्छी वर्षा के साथ, कथित तौर पर दिसंबर 2024 के अंत तक कावेरी का 282.241 टीएमसी फीट पानी तमिलनाडु के बिलिगुंडलु तक पहुंच गया है। कावेरी जल विनियमन समिति के आदेशों और कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण के अंतिम आदेश के अनुसार कर्नाटक को जल वर्ष (जून 2024-मई 2025) के अंत तक 177 टीएमसी फीट कावेरी पानी छोड़ना था।