
मेंगलूरु के सीएइएन थाने की कार्रवाई, 11 आरोपी गिरफ्तार
ऑनलाइन निवेश के नाम पर ठगी के बढ़ते मामलों के बीच मेंगलूरु साइबर, आर्थिक और नार्कोटिक्स (सीइएन) अपराध थाने की पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल करते हुए एक अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। एक ही शिकायत की जांच के दौरान पुलिस ने देश-विदेश में फैले इस नेटवर्क से जुड़े कुल 4,580 धोखाधड़ी मामलों का खुलासा किया है और अब तक 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
पुलिस के अनुसार, एक व्यक्ति ने सीइएन थाने में शिकायत दर्ज कराई थी कि उसे ऑनलाइन निवेश पर अधिक रिटर्न का झांसा देकर ठगों ने 10 अलग-अलग बैंक खातों में कुल 1.38 करोड़ रुपए ट्रांसफर करवा लिए। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने तकनीकी और वित्तीय जांच शुरू की, जिसके दौरान बड़े पैमाने पर चल रहे साइबर फ्रॉड नेटवर्क की परतें खुलती चली गईं।
जांच में सामने आया कि जिन 10 बैंक खातों का उपयोग शिकायतकर्ता से पैसे हड़पने के लिए किया गया था, उन्हीं खातों के जरिए कुल 128 अन्य धोखाधड़ी मामलों को अंजाम दिया गया था। इन मामलों को लेकर देश के विभिन्न हिस्सों में 36 प्राथमिकी पहले ही दर्ज की जा चुकी हैं। पुलिस के तकनीकी विश्लेषण में यह भी सामने आया कि इस नेटवर्क का संचालन नेपाल और उसके आसपास के इलाकों से किया जा रहा था।
इस मामले में पुलिस ने सौम्यादित्य (30), पपला शिवकुमार यादव (39), गौरव (26), हर्ष मिश्रा (25), राजेश (27), आकीब (32), राजीव रंजन कुमार (30), मिथुन कुमार (40), नौशाद अली (34), अमजद (31) और ओमप्रकाश यादव (34) को गिरफ्तार किया है। सभी आरोपी इस संगठित साइबर ठगी नेटवर्क के अलग-अलग हिस्सों में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे।
जांच के दौरान यह भी खुलासा हुआ कि ठगों का एक समूह एजेंटों के जरिए निवेशकों से संपर्क करता था और उनसे ठगी गई रकम को अमेरिकी डॉलर में बदलकर विदेश भेज दिया जाता था। नेटवर्क का एक हिस्सा कंबोडिया और अन्य देशों में सक्रिय था, जहां से कॉल सेंटर के जरिए भारतीय निवेशकों को फोन कर अधिक मुनाफे का लालच दिया जाता था।
पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने काम की तलाश में विदेश गए कई भारतीयों को भी इस नेटवर्क में शामिल कर रखा था। ये लोग स्थानीय भाषाओं में निवेशकों से बातचीत कर भरोसा जीतते थे, जबकि नेपाल में बैठी टीम पूरे पैसों के लेन-देन और बैंकिंग गतिविधियों को नियंत्रित करती थी।
धोखेबाज सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे व्हाट्सऐप, टेलीग्राम और इंस्टाग्राम के जरिए लोगों से संपर्क करते थे। वे नकली निवेश ऐप के माध्यम से पीड़ितों को फर्जी मुनाफा दिखाते थे और शुरुआत में थोड़ी रकम वापस कर भरोसा जीतते थे। इसके बाद बड़ी रकम निवेश करवा कर ठगी की जाती थी।
पुलिस ने बताया कि आरोपी अपनी पहचान छिपाने के लिए अलग-अलग कंपनियों के मोबाइल फोन, सिम कार्ड और कई बैंक खातों का इस्तेमाल करते थे तथा नेट बैंकिंग के जरिए रकम को विभिन्न खातों में ट्रांसफर कर गायब हो जाते थे। मामले की जांच अभी जारी है और पुलिस को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में इस नेटवर्क से जुड़े और लोगों की गिरफ्तारी हो सकती है।
Published on:
07 Feb 2026 12:10 am
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