
संजय करीर
बेंगलूरु. शहर की चार सबसे बड़ी विधानसभाओं में से एक राज राजेश्वरीनगर पहले उत्तरहल्ली विधानसभा क्षेत्र का हिस्सा थी। राज राजेश्वरी माता मंदिर के लिए विख्यात और अब एक स्वतंत्र विधानसभा क्षेत्र के रूप में विकसित हो चुके इस क्षेत्र का नाम अक्सर कई गलत कारणों से भी चर्चाओं में रहता है। फिर चाहे वह स्थानीय विधायक के खिलाफ महिला पार्षदों की लड़ाई हो या पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या का मामला, राज राजेश्वरी नगर किसी न किसी कारण सुर्खियों में बना रहता है।
चुनावों की घोषणा से ठीक पहले जब प्रत्याशी चयन की कवायद चल रही थी, तो जनता दल ध के राष्ट्रीय अध्यक्ष एचडी देवेगौड़ा के पौत्र प्रज्वल रेवण्णा की दावेदारी को लेकर काफी उठापटक हुई। आखिरकार देवेगौड़ा ने सार्वजनिक रूप से कहा कि प्रज्वल को पार्टी उम्मीदवार नहीं बनाएगी। कहा जा रहा है कि देवेगौड़ा ने प्रज्वल को विधानसभा चुनाव नहीं लडऩे को इसलिए कहा क्योंकि वे उन्हें अगले साल हासन से लोकसभा चुनाव लड़वाना चाहते हैं। भाजपा के पूर्व पार्षद जीएच रामचंद्र ने पिछले माह टिकट नहीं मिलने के बाद पार्टी छोड़ कर जद ध की सदस्यता ली थी, अब उन्हें राजराजेश्वरी नगर से पार्टी का अधिकृत प्रत्याशी बनाया गया है। रामचंद्र की बहू अमूल्या कन्नड़ फिल्मों की लोकप्रिय अभिनेत्री हैं और अपने ससुर के साथ उन्होंने भी पार्टी की सदस्यता ली है। अब वे अपने पति जगदीश के साथ चुनाव प्रचार में जुटी हैं। रामचंद्र को उतारने के बाद स्थानीय लोगों में इस बात की चर्चाएं उठी हैं कि स्थानीय विधायक मुनिरत्ना नायडू और जद ध के बीच आपसी समझौता हुआ है, इसलिए एक बेहद नए और तुलनात्मक रूप से कमजोर प्रत्याशी को उतारा गया।
हितों के टकराव के राजनीतिक निहितार्थ
वैसे रामचंद्र के अलावा भाजपा के प्रत्याशी पीएम मुनिराजू गौड़ा को भी स्थानीय मतदाता कमजोर प्रत्याशी बता रहे हैं। लेकिन कहानी इतनी ही नहीं है। एचडी रेवण्णा के पुत्र प्रज्वल के भाई निखिल (एचडी कुमारस्वामी का पुत्र) एक उभरते हुए फिल्म अभिनेता हैं, जिन्होंने दो साल पहले एक फ्लॉप फिल्म जगुआर से अपना कॅरियर शुरू किया था। वे अब एक बड़ी फिल्म कुरुक्षेत्र में अभिमन्यु की भूमिका निभा रहे हैं और सबसे रोचक बात यह है कि उस फिल्म के निर्माता मुनिरत्ना हैं। हालांकि, दोनों कुमारस्वामी और मुनिरत्ना ने जोर देकर इस बात का खंडन किया है कि निखिल की वजह से इस सीट पर कोई दोस्ताना मुकाबला नहीं हो रहा। कुमारस्वामी ने कहा कि वे अपने बेटे के कॅरियर के लिए पार्टी के हितों से कोई समझौता नहीं करेंगे। लेकिन राजनीतिक पर्यवेक्षक इस बात को हजम नहीं कर पा रहे।
कांग्रेस और जद (ध) का दबदबा
करीब 4.5 लाख मतदाताओं वाले इस क्षेत्र में इस बार कुल १४ प्रत्याशी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। इनमें से कांग्रेस, भाजपा और जद ध के अलावा ४ निर्दलीय तथा बाकी अन्य क्षेत्रीय दलों के प्रत्याशी हैं। इनमें से एक एल.वेंकटराम भी हैं, जिन्हें आमतौर पर हुच्चा वेंकट के नाम से जाना जाता है। कन्नड़ फिल्मों की लोकप्रिय को आधार बनाकर हुच्चा चुनाव मैदान में कूद गए हैं लेकिन मतदाता उन्हें कितनी गंभीरता से ले रहे हैं, यह नतीजे आने के बाद पता चल जाएगा। वोक्कालिगा मतदाताओं की बहुलता वाले इस विधानसभा क्षेत्र में आमतौर पर कांग्रेस का वर्चस्व रहा है। क्षेत्र में 9 वार्ड आते हैं, जिनमें से 5 में कांगे्रस, 3 में भाजपा और एक में जद ध का पार्षद है। इसके पड़ोस में रामनगर की सीट है, जहां आमतौर पर जद ध का वर्चस्व रहता है इसलिए राज राजेश्वरी नगर में भी जद ध की धमक सुनाई देती रहती है। पिछले चुनाव में कांग्रेस का सीधा मुकाबला जद ध से ही हुआ था और मुनिरत्ना ने केएलआर तिम्मनजय्या को हराया था।
विशाल क्षेत्र लेकिन विकसित नहीं
इस इलाके के लोगों की नजर में सबसे बड़ी समस्या कचरे का नियमित निस्तारण, खराब सड़कें और आपराधिक गतिविधियों पर नियंत्रण नहीं होना है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यातायात सुधारने की जरूरत है। सड़कें बनने के फौरन बाद किसी दूसरी एजेंसी द्वारा खोद दिया जाना और फिर मरम्मत नहीं होना खराब यातायात व्यवस्था की एक सबसे बड़ी वजह है। मैसूरु रोड से इस क्षेत्र में प्रवेश का स्थान यानि गोपालन आर्च पर लगने वाले जाम को खत्म करने का रास्ता ढूंढा जाना चाहिए। इलाके में कई मशहूर और बड़े शैक्षणिक संस्थान होने से यहां बड़ी संख्या में दूसरे राज्यों और शहरों से आए छात्र भी रहते हैं। शहर के बाहरी इलाके में होने के कारण कई औद्योगिक क्षेत्र भी इससे जुड़े हैं, जहां बड़ी संख्या में श्रमिक रहते हैं। लेकिन यह पूरा इलाका अच्छी तरह विकसित नहीं हुआ है। बेंगलूरु में अनियंत्रित विकास की समस्या यहां भी विद्यमान है। लोगों का कहना है कि बड़ा क्षेत्र होने से जनता की समस्याओं को सही तरीके से नहीं सुना जा रहा।
विवादों का पिटारा
स्थानीय विधायक मुनिरत्ना की कार्यशैली के कारण यहां के वार्ड पार्षदों को उनसे काफी समस्याएं हैं और पिछले साल तीन महिला पार्षदों ने उनके खिलाफ गंभीर आरोप लगा कर सरेआम मोर्चा खोल दिया था। तीन में एक भाजपा और जद ध की पार्षद होने के साथ ही एक एचएमटी कांग्रेस पार्षद उमा सुरेश भी थीं। उमा सुरेश ने मुनिरत्ना और उनके समर्थकों द्वारा किए गए उत्पीडऩ के खिलाफ खुल कर आवाज उठाई और अब वे चुनाव में भी मुनिरत्ना के खिलाफ बेखौफ होकर काम कर रही हैं।