राजाजीनगर जैन स्थानक में प्रवचन
बेंगलूरु. राजाजीनगर जैन स्थानक में साध्वी चैतन्यश्री ने कहा कि आज का व्यक्ति संपत्ति, ख़ज़ाने से धनवान बन गया है लेकिन अध्यात्म जगत से अभी तक धनवान नहीं बना हैं। हमें यह सोचना है कि हम रिश्तों में कितने धनी हैं। आज के रिश्तों में स्वार्थ है। रिश्तों में आनंद और सुख नहीं रहा है। वर्तमान समय में लोग धन को अधिक महत्व देने लगे हैं। धन के आगे पारिवारिक रिश्ते कमजोर पड़ गए हैं। रिश्ते अनमोल होते है ,इन्हें संभालना आवश्यक है। जो रिश्तों को संभाल लेगा वह संघ समाज को संभाल लेगा। अहंकार और संपत्ति हमारे रिश्तों को बिगाड़ते है। अमीर वही है जो रिश्तों में धनवान है। हमारे रिश्तों में आदर सम्मान और स्नेह का भाव होना चाहिए। रिश्तों में धनवान बनना है तो मन देना सीखो , मान देना सीखो और माफी देना सीखो।
इसके पूर्व साध्वी जिज्ञासा ने कहा कि सुख परमात्मा ने हमें दिया है और दुःख हमारे ख़ुद का निर्माण है। हम स्वयं इसके ज़िम्मेदार हैं। हमारा अंतःकरण सकारात्मक होगा तो हमारा आत्मबल बढ़ेगा। परमात्मा ने चार सूत्र सुखी होने के दिए हैं - एक्ट पॉजिटिव , बी पॉजिटिव , काउंट पॉजिटिव और ड्रीम पॉजिटिव।इस अवसर पर चेन्नई से नवीन श्रीश्रीमाल, संतोष पगारिया, अजीत कोठारी , हुब्बल्ली से पुखराज कोठारी व अन्य क्षेत्रों से अतिथि उपस्थित हुए। लाभार्थी धीरजकुमार नीरजकुमार नाहर परिवार रहे। त्रिशला महिला मंडल की मंत्री रेखा पोखरणा ने विचार रखे। राजाजीनगर संघ अध्यक्ष प्रकाशचंद चाणोदिया ने साधर्मिक सेवा के सभी चेयरमैन का अभिनंदन किया और संचालन संघ मंत्री नेमीचंद दलाल ने किया।