
FILE PHOTO
अखिल भारतीय लोकतांत्रिक छात्र संगठन AIDSO (एआइडीएसओ) की कर्नाटक राज्य समिति ने केपीएस-मैग्नेट स्कूल योजना के क्रियान्वयन की कड़ी निंदा की है। आरोप लगाया है कि भारी जनविरोध के बावजूद राज्य सरकार इस योजना को जबरन लागू करने पर अड़ी हुई है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा व्यवस्था को गंभीर नुकसान होगा।
एआइडीएसओ के अनुसार राज्य सरकार प्रत्येक पंचायत में केवल एक केपीएस-मैग्नेट स्कूल स्थापित करने की योजना के तहत कुल 6,000 स्कूल शुरू कर रही है, जिसके परिणामस्वरूप ग्रामीण इलाकों के 40,000 से अधिक सरकारी स्कूल बंद हो जाएंगे। योजना के पहले चरण में ही 900 मैग्नेट स्कूलों की स्थापना का आदेश जारी किया जा चुका है। इस परियोजना के लिए एशियाई विकास बैंक से 2,500 करोड़ रुपए का ऋण लिया गया है।
इसके अलावा, कल्याण कर्नाटक क्षेत्र के सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों के उत्थान के लिए निर्धारित केकेआरडीबी फंड से 700 करोड़ रुपए तथा खनन प्रभावित 10 तालुकों के पुनर्वास हेतु बने केएमइआरसी फंड से भी राशि हटाई गई है। अल्पसंख्यक कल्याण निधि से भी 100 करोड़ रुपए इस योजना में लगाए गए हैं। एआइडीएसओ ने इसे जनता के साथ विश्वासघात बताते हुए कहा कि जिन निधियों का उपयोग जनकल्याण के लिए होना चाहिए था, उन्हीं का इस्तेमाल ग्रामीण स्कूलों को बंद करने के लिए किया जा रहा है।
एआइडीएसओ ने यह भी आरोप लगाया कि 30 दिसंबर को जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि इन अनुदानों का उपयोग किसी भी हालत में मौजूदा स्कूलों की मरम्मत या बुनियादी सुविधाओं के सुधार के लिए नहीं किया जाएगा। एआइडीएसओ के अनुसार केपीएस-मैग्नेट योजना के खिलाफ पूरे राज्य में व्यापक जन आंदोलन चल रहा है। हजारों अभिभावक और ग्रामीण अपने स्थानीय स्कूलों को बंद किए जाने के विरोध में सड़कों पर उतर आए हैं। इसके बावजूद सरकार इस निर्णय पर अडिग बनी हुई है।
Published on:
09 Jan 2026 07:47 pm
बड़ी खबरें
View Allबैंगलोर
कर्नाटक
ट्रेंडिंग
